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बेमेतरा के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में 17 आरोपी दोषमुक्त

छत्तीसगढ़ की आज की सबसे बड़ी खबर बेमेतरा जिले से सामने आई है। बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दीक्षित की अदालत ने सुनाया।


64 गवाहों के बयान के बाद फैसला

साजा थाना में इस मामले में कुल 173 लोगों के विरुद्ध धारा 302, 147, 148, 149, 153(3), 201, 109 और 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान 64 अभियोजन साक्षियों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने 17 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।


क्या था बिरनपुर हिंसा मामला?

बिरनपुर गांव में यह विवाद दो बच्चों की मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते सांप्रदायिक तनाव में बदल गया। 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। इसके बाद गांव में आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी मौत हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लागू की थी, जो लगभग दो सप्ताह तक प्रभावी रही।


सीबीआई जांच में हुए कई खुलासे

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। सीबीआई की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि भीड़ ने न केवल भुनेश्वर साहू पर हमला किया, बल्कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी पत्थरबाजी की थी। बताया गया कि सब-इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर ने अपने स्टाफ के साथ युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पुलिस पर भी हमला कर दिया। पत्थरबाजी में सब-इंस्पेक्टर घायल होकर बेहोश हो गए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि घटना के दौरान पत्थर, ईंट और चाकू का इस्तेमाल किया गया था। गंभीर रूप से घायल भुनेश्वर साहू को साजा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


कुल 18 आरोपी, 17 को राहत

शुरुआत में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच में 6 और नाम जोड़े। इस तरह कुल 18 आरोपी बनाए गए थे। जिला न्यायालय ने इनमें से 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। एक आरोपी से संबंधित प्रक्रिया अलग से विचाराधीन बताई जा रही है।


राजनीति और प्रदेश पर पड़ा असर

बिरनपुर हिंसा मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक सौहार्द पर गहरा असर डाला। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा। अब अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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