कोरिया: एसईसीएल चरचा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने पिता के नाम से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाया और इसी आधार पर साल 1998 में अनुकंपा नियुक्ति ले ली। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जीवित चाचा को मृत बताकर नौकरी
विशुनपुर जुनापारा निवासी प्रेमलाल प्रजापति ने चरचा थाना में शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार उनके पिता दशरथ प्रजापति के नाम पर छोटे भाई रामकिशुन प्रजापति की मौत का गलत रिकॉर्ड बनाया गया। रामकिशुन के बेटे छोटेलाल ने कथित षड्यंत्र कर एसईसीएल के सेवा अभिलेखों में अपने पिता के स्थान पर दशरथ प्रजापति का नाम दर्ज करवा दिया और इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति हासिल कर ली।
प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच में पता चला कि भूमि रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेज और अन्य शासकीय अभिलेखों में छोटेलाल के पिता का नाम स्पष्ट रूप से रामकिशुन प्रजापति दर्ज है, जबकि सेवा रिकॉर्ड में दशरथ प्रजापति का नाम अंकित है। इस विरोधाभास से दस्तावेजों में गंभीर स्तर की कूटरचना की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस जांच और संभावित धाराएं
चरचा थाना पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी की आशंका के चलते प्राथमिकी दर्ज की है। जांच में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की संभावना है। यदि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही या भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
28 साल बाद मामला उजागर
करीब तीन दशक तक चलने वाले इस कथित फर्जीवाड़े ने एसईसीएल की भर्ती और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने फर्जी अनुकंपा नियुक्ति निरस्त करने, अवैध वेतन वसूलने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।








