अंबिकापुर। अंबिकापुर शहर से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) की बदहाल स्थिति को लेकर सियासत और जन-आक्रोश दोनों चरम पर हैं। शहर की सड़कों की दुर्दशा पर महापौर मंजूषा भगत का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। महापौर ने साफ कहा कि अगर तय समय के भीतर सड़कों की पैच रिपेयरिंग (गड्ढा भराई) का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे जनता के हित में अपना ‘रौद्र रूप’ दिखाने से पीछे नहीं हटेंगी।
“जनता ने चुना है, जवाब तो देना ही पड़ेगा”
महापौर मंजूषा भगत ने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि शहर की जनता ने उन्हें चुनकर इस कुर्सी पर बिठाया है। लोग बकायदा टैक्स देते हैं, इसलिए बदहाल सड़कों को लेकर सवाल पूछना और जवाब मांगना उनका अधिकार है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद NH विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिससे आम जनता को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
लापरवाह अधिकारियों पर गंभीर आरोप: “सांसद का फोन तक नहीं सुनते”
अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए महापौर ने कहा कि NH विभाग के अधिकारी इस कदर ढीठ हो चुके हैं कि उन्हें जनप्रतिनिधियों की भी परवाह नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि:
“क्षेत्र के सांसद महोदय ने खुद इस संबंध में कई बार अधिकारियों को फोन किया, लेकिन इसके बावजूद सड़क सुधार को लेकर जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा। मैं खुद NH के कार्यपालन अभियंता (EE) के रवैये से तंग आ चुकी हूँ।”
VIP कल्चर पर तंज: “नेताओं के लिए रातों-रात बनती हैं सड़कें”
महापौर ने व्यवस्था के दोहरे चरित्र पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी बड़े नेता या VIP का दौरा होता है, तो यही अधिकारी रातों-रात चमचमाती सड़कें तैयार कर देते हैं। लेकिन जब बात आम जनता की सहूलियत की आती है, तो फाइलें महीनों तक दबी रहती हैं। उन्होंने बेबाकी से जोड़ते हुए कहा, “चाहे कोई भी सरकार आए, व्यवस्था का यही ढर्रा देखने को मिलता है।”
बरसात सिर पर, हालात बिगड़ने की आशंका
गौरतलब है कि मानसून की दस्तक से पहले शहर की मुख्य सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। अगर बारिश से पहले इन गड्ढों को नहीं भरा गया, तो जलजमाव के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ सकता है। महापौर के इस आक्रामक रुख के बाद अब देखना होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया NH विभाग 15 दिनों के भीतर जागता है या फिर शहर को किसी बड़े आंदोलन का गवाह बनना पड़ेगा।










