रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार डिजिटल तकनीक के जरिए ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के विजन को तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से राज्य में कई डिजिटल पहलें लागू की गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (CHiPS) के माध्यम से संचालित ये योजनाएं शासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘सेवा सेतु’ पोर्टल प्रदेश का सबसे बड़ा एकीकृत नागरिक सेवा मंच बन चुका है। इस पोर्टल पर 35 से अधिक विभागों की 564 से ज्यादा सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। अब तक 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 78 लाख से अधिक का समयबद्ध निराकरण किया जा चुका है। आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं अब डिजिटल हस्ताक्षर के साथ सीधे नागरिकों के मोबाइल तक पहुंच रही हैं। पोर्टल में एआई आधारित सहायता, व्हाट्सएप इंटीग्रेशन, आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजीलॉकर और क्यूआर कोड वेरिफिकेशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में ई-ऑफिस प्रणाली को भी तेजी से लागू किया गया है। मंत्रालय, संचालनालय, संभागीय कार्यालय और सभी जिला कलेक्टोरेट अब पेपरलेस कार्यप्रणाली की ओर बढ़ चुके हैं। फाइलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आई है। वहीं ‘प्रोजेक्ट दक्ष’ के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने 5,000 से अधिक नए मोबाइल टावर स्थापित करने और फाइबर नेटवर्क विस्तार का अभियान शुरू किया है। भारतनेट-3 परियोजना के तहत 11,682 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल सेवाओं की पहुंच मजबूत हो रही है।
सरकार ने बड़े विकास कार्यों की निगरानी के लिए ‘ई-प्रगति’ पोर्टल भी शुरू किया है। 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की सैटेलाइट और जीआईएस तकनीक के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से निगरानी की जा रही है। साथ ही प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालयों को स्मार्ट ऑफिस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां डिजीलॉकर और ऑटो डीड जनरेशन जैसी सुविधाओं से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया तेज हुई है।
आईटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवा रायपुर में एआई आधारित ग्रीन एवं एनर्जी एफिशिएंट डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा ‘छत्तीसगढ़ एआई विजन डॉक्यूमेंट’ के तहत विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा एडवांस डेटा लैब स्थापित किए जा रहे हैं। ‘डिजिटल द्वार’ प्लेटफॉर्म और क्लाउड फर्स्ट नीति के जरिए सरकारी डेटा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि सेवा सेतु, ई-ऑफिस, भारतनेट, ई-प्रगति और एआई आधारित पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस का मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है और तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।










