ढाका/सुनामगंज। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ जारी लक्षित हिंसा (Targeted Violence) रुकने का नाम नहीं ले रही है। ताज़ा मामला सुनामगंज जिले से सामने आया है, जहाँ एक हिंदू युवक जॉय महापात्रो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने देश में अगले महीने होने वाले चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बर्बरता की हदें पार: पहले पीटा, फिर पिलाया जहर
मृतक जॉय महापात्रो के परिजनों ने स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने जॉय को पहले बेरहमी से पीटा और जब उसका मन नहीं भरा, तो उसे जबरन जहर दे दिया गया। जॉय को गंभीर स्थिति में सिलीहट के एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद द्वारा जारी आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। परिषद के अनुसार, अकेले दिसंबर 2025 के महीने में सांप्रदायिक हिंसा की 51 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं:
- हत्याएं: 10 हिंदुओं की जान ली गई (जिनमें दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास जैसे नाम शामिल हैं)।
- लूटपाट व आगजनी: 23 मामले।
- डकैती: 10 मामले।
- ईशनिंदा के झूठे आरोप: 4 मामले, जिनमें हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया।
- भीड़ द्वारा हत्या: शरियतपुर में एक हिंदू व्यापारी की मॉब लिंचिंग ने देश को झकझोर कर रख दिया था।
चुनाव से पहले दहशत का माहौल
मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों को डराने और उन्हें पलायन के लिए मजबूर करने के लिए इस तरह के हमलों को अंजाम दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब बांग्लादेश सरकार पर हैं कि क्या वह अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान कर पाएगी या हिंसा का यह नंगा नाच यूं ही जारी रहेगा।








