सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जान गोलापल्ली में रविवार को दोरला समाज का पटेल–पुजारी चर्चा परिचर्चा सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में समाज से अलग होकर ईसाई बने 47 परिवारों की विधिवत समाज में पुनः वापसी कराई गई। मंच से सम्मानपूर्वक इन परिवारों को समाज की मुख्यधारा में शामिल किया गया।
इस सम्मेलन में 9 पंचायतों के 40 गांवों से लगभग 3,000 परिवारों ने भाग लेकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का परिचय दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों और वक्ताओं ने कहा कि दोरला समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था अत्यंत सशक्त रही है, लेकिन हाल के वर्षों में अन्य संस्कृतियों की ओर बढ़ता आकर्षण समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने समाजजनों से अपनी जड़ों की ओर लौटने और आत्ममंथन करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में समाज द्वारा 16 प्रमुख सामाजिक नियमों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इसके तहत विवाह समारोहों में डीजे और अंग्रेजी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध, सामाजिक मर्यादा भंग करने पर आर्थिक दंड, गैर-आदिवासी विवाह, बहुविवाह और मंदिर विवाह जैसे मामलों में कड़े सामाजिक निर्णय लेने का प्रावधान तय किया गया।
कार्यक्रम में संभागीय अध्यक्ष अनिल बुर्का, समाज प्रमुख, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना और दोरला समाज की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना बताया गया।









