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सिगरेट पर टैक्स का ‘हंटर’, पैकेट पर सीधे ₹50 तक बढ़े दाम!

नई दिल्ली। अगर आप सिगरेट पीने के शौकीन हैं, तो आने वाले दिनों में आपकी जेब पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। सरकार द्वारा अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लागू किए जाने के बाद सिगरेट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब 10 सिगरेट वाले एक पैकेट पर उपभोक्ताओं को पहले के मुकाबले कम से कम 22 से 25 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे, जबकि प्रीमियम ब्रांड की सिगरेट पर यह बढ़ोतरी 50 से 55 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच गई है।

सात साल बाद सिगरेट पर इतनी बड़ी टैक्स बढ़ोतरी

पिछले करीब सात वर्षों में यह पहली बार है जब सरकार ने सिगरेट पर टैक्स में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की है। सरकार का तर्क है कि इस कदम का उद्देश्य भारत में तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (Global Public Health Norms) के अनुरूप लाना है, ताकि तंबाकू सेवन को हतोत्साहित किया जा सके।

नया टैक्स ढांचा लागू, पुराना सिस्टम खत्म

दिसंबर में संसद ने जिस नए टैक्स ढांचे को मंजूरी दी थी, वह अब पूरी तरह लागू हो चुका है। इससे पहले जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से ‘जीएसटी कंपनसेशन सेस’ (GST Compensation Cess) का सिस्टम चल रहा था। नए नियमों के तहत अब वितरकों ने पुराने स्टॉक की बिलिंग भी खुदरा विक्रेताओं को 40 प्रतिशत जीएसटी के साथ करना शुरू कर दिया है।

हालांकि, सिगरेट कंपनियों की ओर से अभी तक नई एमआरपी (MRP) के साथ प्रिंटेड पैकेट आधिकारिक तौर पर बाजार में नहीं आए हैं, लेकिन खुदरा बाजार ने अपने स्तर पर नए दाम तय करने शुरू कर दिए हैं।

आपकी पसंदीदा सिगरेट के संभावित नए दाम

टैक्स बढ़ोतरी का असर लगभग सभी प्रमुख ब्रांड्स पर पड़ा है—

  • विल्स नेवी कट (Wills Navy Cut):
    मध्यम वर्ग में लोकप्रिय यह सिगरेट पहले 95 रुपये प्रति पैकेट (10 सिगरेट) मिलती थी, जो अब करीब 120 रुपये तक पहुंच सकती है।
  • प्रीमियम ब्रांड्स (84mm):
    ‘गोल्ड फ्लेक लाइट्स’, ‘विल्स क्लासिक’ और ‘विल्स क्लासिक माइल्ड्स’ जैसे ब्रांड्स पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। इनका 170 रुपये वाला पैकेट अब 220 से 225 रुपये के बीच मिलने की संभावना है।
  • क्लासिक कनेक्ट (Classic Connect):
    पतली सिगरेट की श्रेणी में आने वाले इस ब्रांड के 20 सिगरेट वाले पैकेट की कीमत 300 रुपये से बढ़कर लगभग 350 रुपये तक जा सकती है।

व्यापारियों का कहना है कि महीने के आखिर तक कंपनियां नई प्रिंटेड एमआरपी वाले पैकेट पूरी तरह बाजार में उतार देंगी, जिसके बाद कीमतों की स्थिति और साफ हो जाएगी।

अवैध बाजार और तस्करी बढ़ने का खतरा

कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी ने डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स की चिंता बढ़ा दी है। ऑल इंडिया सिगरेट एंड टोबैको डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने आशंका जताई है कि सिगरेट के अत्यधिक महंगे होने से उपभोक्ता सस्ते और अवैध विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे तस्करी (Smuggling) और अवैध बाजार को बढ़ावा मिलेगा।

फेडरेशन के अनुसार, देशभर में करीब 8,000 से 9,000 स्टॉकिस्ट इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। तंबाकू उत्पाद उन गिनी-चुनी श्रेणियों में शामिल हैं, जिनसे छोटे दुकानदारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा आता है। यदि यह व्यापार अवैध नेटवर्क के हाथों में चला गया, तो ईमानदारी से टैक्स भरने वाले खुदरा विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

स्वास्थ्य बनाम अर्थव्यवस्था की बहस

जहां सरकार इस कदम को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी बता रही है, वहीं कारोबारी वर्ग इसे अव्यावहारिक मान रहा है। अब देखना होगा कि यह टैक्स बढ़ोतरी तंबाकू सेवन को कितना कम कर पाती है और इसका अवैध बाजार पर क्या असर पड़ता है।

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