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मैनपाट में बक्साइट मुआवजे में घोटाले का आरोप, तहसीलदार-पटवारी अटैच

अंबिकापुर/मैनपाट: मैनपाट क्षेत्र में बक्साइट खदान प्रभावितों को दिए जाने वाले लगभग 19 करोड़ रुपये के मुआवजे में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर ने तत्काल जांच समिति का गठन कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कई संदिग्ध मामले सामने आए हैं। आरोप है कि जिन व्यक्तियों के नाम पर मुआवजा स्वीकृत किया गया, उनमें से कुछ के पास संबंधित क्षेत्र में जमीन ही नहीं है। कुछ मामलों में निजी फार्म हाउस को कृषि भूमि दर्शाकर मुआवजा देने की तैयारी की भी खबरें हैं।

अधिकारियों पर कार्रवाई

प्रशासन ने प्राथमिक स्तर पर सख्ती दिखाते हुए मैनपाट के तहसीलदार और संबंधित पटवारी को जिला कार्यालय अटैच कर दिया है। यह कदम जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

फर्जीवाड़े के आरोप

शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे के फार्म हाउस को खेत बताकर मुआवजा देने की तैयारी की गई थी। हालांकि प्रशासन ने इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच समिति को सभी बिंदुओं पर तथ्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीणों में नाराजगी

मुआवजा वितरण में अनियमितताओं की खबरों के बाद प्रभावित ग्रामीणों में आक्रोश है। मैनपाट के उरंगा गांव के 220 और बरिमा गांव के 24 लोगों को मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित था। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक प्रभावितों को न्याय मिले और किसी भी तरह के फर्जी दावों पर रोक लगाई जाए।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट नियत समय में पेश की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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