जांजगीर-चांपा। फर्जी अंकसूची और कूट रचित खेलकूद प्रमाण पत्र के जरिए शिक्षाकर्मी की सरकारी नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर स्थित न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत ने आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप, पिता धोबीलाल, निवासी ग्राम मरघट्टी थाना हसौद, को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपी ने वर्ष 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से हायर सेकेंडरी परीक्षा विज्ञान विषय से दी थी। आधिकारिक परिणाम में उसे भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री मिली थी तथा कुल 500 में से 257 अंक प्राप्त हुए थे।
हालांकि, उसी वर्ष शिक्षाकर्मी पद के लिए आवेदन करते समय आरोपी ने अपने आवेदन पत्र में गलत जानकारी दी। उसने दावा किया कि उसे 500 में से 405 अंक प्राप्त हुए हैं। इसके समर्थन में उसने एक फर्जी अंकसूची प्रस्तुत की, जिसमें भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री को डिस्टिंक्शन दर्शाया गया था और अन्य विषयों के अंक भी बढ़ाए गए थे। साथ ही, आवेदन के साथ कूट रचित खेलकूद प्रमाण पत्र भी संलग्न किया गया था।
यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया, जब ग्राम सेमरिया थाना जैजैपुर निवासी पोथीराम कश्यप ने पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा को लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चितरंजन कश्यप ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है। शिकायत के बाद थाना हसौद पुलिस ने जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए।
जांच उपरांत आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) एवं 474 (जाली दस्तावेज का कब्जा) के तहत मामला दर्ज किया गया। वर्ष 2019 में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। न्यायालय के इस निर्णय को फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।










