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छत्तीसगढ़ में OPS की ओर रुझान, 2.91 लाख से ज्यादा कर्मचारियों ने छोड़ी NPS

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर बड़ा रुझान देखने को मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने नई पेंशन योजना (NPS) छोड़कर OPS को अपनाया है। यह जानकारी विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी।

यह मामला उस समय उठा जब विधायक पुन्नलाल मोहले ने वर्ष 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि कितने कर्मचारियों ने OPS का चयन किया है और उनकी पेंशन प्रणाली कैसे संचालित हो रही है।

इस पर मंत्री चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2004 में OPS को समाप्त कर NPS लागू की थी, लेकिन वर्ष 2022 में OPS को फिर से बहाल कर दिया गया। इसके बाद 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को दोनों योजनाओं में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया गया।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि 1 नवंबर 2004 से पहले नियुक्त कर्मचारी पहले से ही OPS के तहत आते हैं और उनकी पेंशन संबंधी प्रक्रिया महालेखाकार कार्यालय के माध्यम से संचालित होती है। वहीं, बाद में नियुक्त कर्मचारियों ने विकल्प के आधार पर OPS या NPS को चुना है।

NPS की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें कर्मचारी अपने वेतन का 10 प्रतिशत अंशदान करता है, जबकि नियोक्ता 14 प्रतिशत का योगदान देता है। यह राशि नियामक संस्थाओं के माध्यम से निवेश की जाती है। दूसरी ओर, OPS में सामान्य भविष्य निधि (GPF) के तहत 10 प्रतिशत की कटौती होती है, जो सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को दी जाती है।

इसके अलावा, मंत्री ने यह भी बताया कि OPS चुनने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि पर वर्तमान में 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है।

राज्य में OPS को लेकर बढ़ती रुचि से यह साफ है कि कर्मचारी सुरक्षित और सुनिश्चित पेंशन व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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