रायपुर। राजधानी रायपुर में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट अब “औपचारिक” नहीं बल्कि “अनिवार्य” होता जा रहा है। शहर के भीतर हेलमेट को लेकर लंबे समय से जारी ढिलाई के बाद इस बार पुलिस प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। अघोषित तौर पर लागू इस सख्ती के चलते बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों के बड़ी संख्या में ई-चालान काटे जा रहे हैं।
पहले जहां शहर के अंदरूनी इलाकों में बिना हेलमेट वाहन चलाने पर चालानी कार्रवाई नहीं होती थी, वहीं पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद अब शहरी क्षेत्रों में भी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह कदम सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।
पुलिस और न्यायिक विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले में हर सप्ताह औसतन 8 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो रही है, जिनमें से करीब 75 प्रतिशत मृतक दोपहिया वाहन चालक होते हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग रोजमर्रा के काम के लिए रायपुर आते हैं, ऐसे में बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों पर सख्ती जरूरी हो गई है।
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि जो भी वाहन चालक बिना हेलमेट कैमरे में जितनी बार कैद होगा, उसका उतनी बार ई-चालान काटा जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट का उपयोग करें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। साथ ही ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ भी लगातार कार्रवाई जारी है।
कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम को और मजबूत किया गया है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी और फरवरी में क्रमशः 219 और 199 सड़क दुर्घटनाओं में 80 और 61 लोगों की मौत हुई थी, जबकि मार्च में 157 हादसों में 50 लोगों की जान गई। यानी सख्ती के चलते सड़क दुर्घटनाओं में 29 प्रतिशत और मृत्यु दर में 37.5 प्रतिशत की कमी आई है।
ट्रैफिक पुलिस शहर के प्रमुख चौराहों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को हेलमेट पहनने और नियमों का पालन करने के लिए जागरूक भी कर रही है।
हालांकि, कुछ लोग इस कार्रवाई को “टार्गेट पूरा करने” से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों की जान बचाना है।










