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शुभ और अशुभ समय का देती है संकेत…काशी में लगी ये ‘जादुई’ घड़ी है खास

Varanasi News: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्राचीन वैज्ञानिक विरासत से रूबरू कराया है. बाबा विश्वनाथ के धाम में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से समय बताना शुरू कर दिया है. यह घड़ी महज समय नहीं बताती, बल्कि सनातन साइंस का एक संपूर्ण डेटाबेस है. महाकाल की नगरी उज्जैन के बाद यह विश्व की दूसरी ऐसी घड़ी है, जो पूरी तरह से भारतीय कालगणना पर आधारित है. 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह अनूठी वैदिक घड़ी भेंट की थी.

अब इसे श्री काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है. काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि इस घड़ी का संचालन सीधे सूर्योदय से जुड़ा है.

क्यों है यह दुनिया की सबसे अनोखी घड़ी?

इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह उस स्थान के सूर्योदय के अनुसार खुद को ढाल लेती है. इस एक घड़ी में वैदिक समय और भारतीय स्टैंडर्ड टाइम (IST), विक्रम संवत, मास, पंचांग, ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की चाल, भद्रा की स्थिति और शुभ-अशुभ मुहूर्त सबकी जानकारी मिलेगी.

30 घंटे का दिन और काष्ठा का हिसाब

वैदिक घड़ी समय को आधुनिक सेकंड या मिनट में नहीं, बल्कि प्राचीन शास्त्रीय पद्धति से मापती है. इसका गणित भी अलग है. यहां एक दिन 24 घंटे का नहीं, बल्कि 30 मुहूर्त का होता है. एक मुहूर्त की अवधि लगभग 48 मिनट होती है. एक दिन में 900 कला होती हैं (अवधि लगभग 96 सेकंड). एक दिन में 27,000 काष्ठा होती हैं (अवधि लगभग 3.2 सेकंड).

180 भाषाओं वाला ऐप

इस प्राचीन ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप’ भी लॉन्च किया गया है. इस ऐप की विशेषताएं किसी भी आधुनिक स्मार्ट वॉच को टक्कर देने वाली हैं. इसमें पिछले और अगले 5800 सालों का पंचांग उपलब्ध है. यह आपको हर शुभ और अशुभ समय का संकेत अलार्म के जरिए देगा. आपके शहर का तापमान, हवा की गति और आर्द्रता (Humidity) की सटीक जानकारी. यह ऐप 180 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है.

बीएचयू के प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, काशी के विद्वानों के मार्गदर्शन में बनी यह घड़ी युवा पीढ़ी को भारतीय समय चक्र और वैज्ञानिक गौरव से परिचित कराएगी. अब दुनिया देखेगी कि भारत की प्राचीन गणना आज भी कितनी सटीक और प्रासंगिक है.

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