गरियाबंद। जिले के भालू डिग्गी क्षेत्र के घने जंगलों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया। रूटीन सर्चिंग अभियान पर निकले जवानों को जंगल के भीतर माओवादियों का एक गुप्त वर्कशॉप नजर आया। सतर्क जवानों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर अपनी-अपनी पोजिशन ली और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया।

जवानों की एक विशेष टीम जब नक्सलियों के इस गुप्त ठिकाने तक पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। माओवादियों ने यहां हथियारों और विस्फोटकों का भारी जखीरा जमा कर रखा था। मौके से न सिर्फ अत्याधुनिक हथियार, बल्कि हथियार और विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बड़ी मात्रा में बरामद किया गया।

घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे इस इलाके में मिले हथियारों के जखीरे को देखकर अंदेशा जताया जा रहा है कि नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। हालांकि, इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में कामयाब होते, सुरक्षाबलों ने उनके हाइडआउट को ध्वस्त कर दिया।

बरामद सामग्री
- 2 इंसास राइफल
- 1 थ्री नॉट थ्री राइफल
- 2 बारह बोर बंदूक
- 1 देशी कट्टा
- 7 जिंदा बम
- कोडेक्स वायर
- 240 से अधिक डेटोनेटर
- 300 जिंदा कारतूस
- 21 स्वचालित हथियारों की मैगजीन
- नक्सलियों के 6 डंप
- बीजीएल सेल
- ग्रेनेड लॉन्चर
- हथियार बनाने का सामान
- कुल 57 छोटे-बड़े हथियार
- भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री

ऑपरेशन विराट के तहत कार्रवाई
पूरी कार्रवाई “ऑपरेशन विराट” के तहत की गई, जो करीब 36 घंटे से अधिक समय तक चली। गरियाबंद जिले की सीमा महाराष्ट्र के जंगलों से लगी होने के कारण नक्सली अक्सर वारदात के बाद सीमावर्ती इलाकों में छिप जाते हैं, लेकिन इस सफल ऑपरेशन के बाद उनके सुरक्षित ठिकानों पर करारा प्रहार हुआ है।
सुरक्षाबलों की इस बड़ी सफलता से यह साफ संकेत मिल रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की आवाजाही अब सुरक्षित नहीं रही है और उनका नेटवर्क लगातार सिमटता जा रहा है।








