टेक डेस्क: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां बैंकिंग आसान हुई है, वहीं ठगों ने भी चोरी के नए रास्ते निकाल लिए हैं। आजकल AEPS (Aadhaar Enabled Payment System) के जरिए लोगों के खातों से बिना किसी OTP या PIN के पैसे उड़ाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आपके खाते का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) के तौर पर अवैध लेनदेन के लिए भी किया जा सकता है।
कैसे होता है यह ‘बिना OTP वाला’ स्कैम?
ठग सबसे पहले सरकारी दफ्तरों, लीक हुए डेटा या फोटोकॉपी की दुकानों से आपका आधार नंबर और फिंगरप्रिंट का डेटा चुराते हैं। स्कैमर्स सिलिकॉन की मदद से आपके फिंगरप्रिंट का क्लोन (नकली फिंगरप्रिंट) तैयार करते हैं। इस नकली फिंगरप्रिंट और आधार नंबर का इस्तेमाल माइक्रो-एटीएम पर करके आपके खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। आपको भनक तक नहीं लगती क्योंकि इसके लिए किसी पासवर्ड की जरूरत नहीं होती।
क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account)?
जब स्कैमर्स किसी मासूम व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर-बदल करने के लिए करते हैं, तो उसे ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। कई बार लोग चंद रुपयों के लालच में अपना खाता किराए पर दे देते हैं या फिर ठग अनजाने में आपके खाते का एक्सेस हासिल कर लेते हैं। ऐसे में पुलिस कार्रवाई की आंच सीधे आप पर आती है।
बचाव का नया हथियार: GPS इनेबल डिवाइसेस
बीएलएस ई-सर्विसेज (BLS E-Services) के चेयरमैन शिखर अग्रवाल के अनुसार, अब इन फ्रॉड्स को रोकने के लिए GPS इनेबल डिवाइसेस का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि ट्रांजैक्शन केवल एक रजिस्टर्ड एरिया (जैसे बैंक मित्र की दुकान) से ही हो। अगर कोई ठग रजिस्टर्ड एरिया के बाहर से पेमेंट रिक्वेस्ट भेजता है, तो सिस्टम उसे अपने आप रद्द कर देता है। भविष्य में इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ‘लाइवेनेस चेक’ जैसी तकनीक जुड़ेंगी, जो यह पहचान लेंगी कि फिंगरप्रिंट असली इंसान का है या सिलिकॉन का।
खुद को सुरक्षित रखने के 5 गोल्डन रूल्स:
- बायोमेट्रिक्स लॉक करें: सबसे सुरक्षित तरीका है कि आप m-Aadhaar ऐप या UIDAI की वेबसाइट पर जाकर अपना बायोमेट्रिक लॉक कर दें। जब जरूरत हो तभी इसे खोलें।
- फोटोकॉपी की दुकान पर सावधानी: अपनी आधार की कॉपी किसी भी असुरक्षित दुकान पर न छोड़ें। फिजिकल आधार कार्ड साथ रखें और काम होने पर प्रिंटर में बची हुई कॉपी नष्ट करवा दें।
- मास्कड आधार (Masked Aadhaar): जहां जरूरी न हो, वहां पूरा आधार नंबर देने के बजाय मास्कड आधार (जिसमें सिर्फ आखिरी 4 अंक दिखते हैं) का इस्तेमाल करें।
- अनजान के साथ शेयर न करें: अपना आधार नंबर या फिंगरप्रिंट किसी भी अनाधिकृत सेंटर पर न दें।
- लोकेशन ट्रैक: हमेशा अधिकृत बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट या बैंक शाखा से ही AEPS लेनदेन करें।








