छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। विवादित बयान के मामले में अग्रिम जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अमित बघेल को सर्वोच्च न्यायालय से किसी भी तरह की राहत नहीं मिली। कोर्ट ने बघेल की ओर से दर्ज सभी FIR को एक साथ क्लब करने की मांग को सख्त शब्दों में खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जहां-जहां FIR दर्ज हुई है, आरोपी को वहीं की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “आप अपनी ज़ुबान संभालकर रखें। राज्य पुलिस आएगी, आपको अपने-अपने राज्यों में ले जाएगी। पूरे देश की सैर का आनंद लीजिए।” कोर्ट ने साफ किया कि वह FIR को एक ही राज्य में ट्रांसफर करने जैसी किसी भी मांग पर हस्तक्षेप नहीं करेगी।
अमित बघेल की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट को बताया कि उनका विवादित बयान स्वीकार्य नहीं था, लेकिन वह गुस्से में दिया गया था और किसी की भावनाएं आहत करने का उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी दलील दी कि छत्तीसगढ़ में पहले से पांच FIR दर्ज हैं, इसलिए अन्य राज्यों की FIR को वहीं ट्रांसफर किया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को मानने से इनकार कर दिया।
अमित बघेल पिछले 26 दिनों से फरार बताए जा रहे हैं। उन पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु सहित देश के 12 राज्यों में दर्जनों FIR दर्ज हैं। विवादित बयान के बाद देशभर में सिंधी समाज ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कई शहरों में बघेल का पुतला दहन किया गया और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर कठोर कार्रवाई की मांग की गई। समुदाय का आरोप है कि अमित बघेल ने सिंधी समाज को ‘पाकिस्तानी’ कहकर अपमानित किया था, जिसके बाद मामले ने तेजी से तूल पकड़ा।










