बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने गुरुवार, 2 अप्रैल को मुख्य आरोपी अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। इस आदेश के बाद अमित जोगी की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सतीश जग्गी ने जताई संतुष्टि
स्व. रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंततः न्याय की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि आज हनुमान जयंती के दिन मुझ पर विशेष कृपा हुई। उनके अनुसार, उनके और परिवार की 20 साल की तपस्या का न्यायालय में फल मिला है। उन्होंने न्यायालय, सीबीआई और सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने न्याय की इस यात्रा में सहयोग दिया। हालांकि सतीश जग्गी ने कहा कि खुशी अधूरी है क्योंकि उनके पिता की हत्या हो चुकी है।
सीबीआई ने पेश की थी 11,000 पन्नों की रिपोर्ट
रामावतार जग्गी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 11,000 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में अमित जोगी के खिलाफ भी चार्ज लगाया गया था। कोर्ट ने पहले अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केस दोबारा ओपन किया गया।
सरेंडर के लिए तीन सप्ताह का समय
हाईकोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। अब माना जा रहा है कि उनके लिए कानूनी प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण होगी।
मामला और पृष्ठभूमि
साल 2003 में रायपुर में राकांपा नेता रामावतार जग्गी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में 28 लोगों को 2007 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को पहले बरी किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस का रिओपन
दो साल पहले हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने दोषियों की अपील खारिज कर दी थी और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार की और मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई के लिए भेजा। इसके बाद हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी मानते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर का आदेश दिया।
इस फैसले के साथ ही छत्तीसगढ़ के इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्याय प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गई है और राज्य में इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल जारी है।








