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बस्तर का मिलिट्री ब्रेन, गुरिल्ला वॉरफेयर का ब्लैक मास्टर: माड़वी हिडमा की खौफनाक कहानी, जिसका आज हुआ अंत

रायपुर। Madvi Hidma- दो दशक तक बस्तर के जंगलों में “अदृश्य मौत” बनकर घूमने वाला देश का सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा अब इतिहास बन चुका है. आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा के घने जंगलों में आज तड़के हुई भयंकर मुठभेड़ में हिडमा और उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का सहित छह नक्सली मारे गए.

बस्तर के जंगलों में फैले नक्सली नेटवर्क का सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर मादवी हिडमा वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होता रहा. हिडमा का जन्म वर्ष 1981 में सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ. बेहद कम उम्र में ही वह माओवादी विचारधारा से प्रभावित हुआ और मात्र 15 साल की उम्र में पीपुल्स वॉर ग्रुप से जुड़ गया. इसके बाद उसने संगठन में अलग-अलग स्तरों पर काम किया और धीरे-धीरे एक बेहद कुशल और खतरनाक कमांडर के रूप में उभरा. (Madvi Hidma)

1996 में मादवी हिडमा पामेड़ रेंज कमिटी में एक्टिव था. शुरुआती वर्षों में उसने दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ (DAKMS) में काम किया. 2000 में एसएमसी की स्थापना के बाद उसे इसमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई. कहा जाता है कि रमन्ना और देवजी जैसे शीर्ष माओवादी नेताओं ने हिडमा को खुद प्रशिक्षित किया और उसे गुरिल्ला युद्धकला में माहिर बनाया. (Madvi Hidma)

1997-98 के दौरान उसे हथियारों की मरम्मत और चलाने की ट्रेनिंग मिली. कुछ समय बाद उसे दंडकारण्य स्पेशल ज़ोन कमेटी (DKSZC) में प्रोमोट किया गया और वह डीकेएसजेडसी का सचिव बन गया, जो नक्सली संगठन का बेहद प्रभावशाली पद है. हिडमा को देश के सबसे कुख्यात नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है. बीते 20 वर्षों में उसने कम से कम 26 बड़े हमलों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया. उसके सिर पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था.(Madvi Hidma)

6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के ताड़मेटला इलाके में हुआ यह हमला देश में सुरक्षा बलों पर हुआ सबसे बड़ा नक्सली हमला था. सीआरपीएफ की 150 जवानों की टुकड़ी ताड़मेटला से गुजर रही थी, तभी करीब 1000 नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया. कई घंटों तक चली मुठभेड़ में 76 जवान शहीद हुए. नक्सलियों ने उनके हथियार भी लूट लिए. इस हमले की पूरी रणनीति हिडमा ने तैयार की थी.(Madvi Hidma)

25 मई 2013 को सुकमा में परिवर्तन यात्रा से लौट रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले पर झीरम घाटी (दरभा घाटी) में नक्सलियों ने हमला कर दिया. हमले में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे, महेंद्र कर्मा और कई प्रमुख नेताओं सहित 27 लोगों की मौत हुई. महेंद्र कर्मा, जिनको नक्सली सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे, को नक्सलियों ने बेहद क्रूर तरीके से मारा. इसका भी मुख्य साजिशकर्ता भी हिडमा ही था.(Madvi Hidma)

20 मार्च 2017 को सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ के जवानों पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया. 25 जवान शहीद हो गए. हमले के दौरान करीब 350400 नक्सली शामिल थे. इस हमले का खाका भी हिडमा ने खींचा था.

2021 में सुकमा-बीजापुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए हमले में 22 जवान शहीद हुए. यह बीते सात वर्षों में सुरक्षा बलों पर हुआ सबसे भीषण हमला था. इसमें भी हिडमा की भूमिका सामने आई. नक्सली दस्ते में बड़ी संख्या में महिला सदस्य भी शामिल थीं. इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों ने कई हथियार लूट लिए थे और सुरक्षा बलों को भारी क्षति पहुंचाई थी.

हिडमा दक्षिण और पश्चिम बस्तर के बीहड़ इलाकों बेज्जी, बुरकापाल, एल्मागुंडा, तोंडामरका, सल्लाटोंग, एर्रापल्ली, गोंडेबटुम में लगातार एक्टिव रहा. उसे नक्सल संगठन में मिलिटरी ब्रेन माना जाता था. जंगलों पर उसकी ऐसी पकड़ थी कि सुरक्षा बलों के लिए उसे पकड़ना लगभग असंभव माना जाता था. वह बेहद तेज़ी से मूवमेंट बदलता था और अपने दस्ते को 300400 लड़ाकों तक की शक्ति के साथ ऑपरेशन में उतारता था.

हिडमा की सुरक्षा के लिए कई प्रशिक्षित गार्ड तैनात रहते थे. वह लगातार गांव बदलता रहता था और जंगल के छोटे-छोटे मार्गों का उपयोग कर सुरक्षा बलों की घेराबंदी से निकल जाता था.

2014 में ऑरछा (माड़) में हुई DKSZC और SMC बैठक में हिडमा ने हिस्सा लिया. 2019 में भी वह कई शीर्ष केंद्रीय कमेटी सदस्यों के साथ PB (पॉलिट ब्यूरो) की बैठक में मौजूद था. वर्षों की तलाश और लगातार चल रहे अभियान के बाद सुरक्षा बलों ने आंध्र प्रदेशछत्तीसगढ़ सीमा के जंगलों में उसे ढेर कर दिया. उसकी पत्नी भी इस मुठभेड़ में मारी गई. हिडमा की मौत को छत्तीसगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है.

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