क्या बिलासपुर की सड़कों पर अब आम आदमी सुरक्षित नहीं है? क्या न्यायधानी में अपराधियों का हौसला इतना बुलंद हो गया है कि उन्हें पुलिस के एनकाउंटर का भी डर नहीं रहा… 3 दिन… सिर्फ 3 दिन और 2 बड़ी लूट की वारदातें…एक तरफ साढ़े तीन करोड़ की डकैती की स्याही सूखी भी नहीं थी कि सीपत में 50 लाख के जेवर फिर उड़ गए। आज सवाल बिलासपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर है। आज सवाल उस सुरक्षा के दावे पर है जो खोखला नजर आ रहा है…
शुक्रवार की शाम, सीपत थाना क्षेत्र। सराफा कारोबारी विनय सोनी दुकान बंद कर रहे थे। उन्होंने 7 साल की मेहनत और कमाई के जेवर तीन बैग में भरे। शटर का ताला लगाने के लिए जैसे ही झुके, पीछे से काल की तरह तीन बाइक सवार आए और सेकंडों में 50 लाख का माल लेकर रफूचक्कर हो गए। ग्रामीण इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की कमी का बहाना कब तक चलेगा? क्या पुलिस को नहीं पता था कि त्योहारों और शादियों के सीजन में ज्वेलर्स निशाने पर होते हैं…जब 3 दिन पहले ही एक बड़ी वारदात हुई थी, तो सड़कों पर नाकाबंदी और चेकिंग सघन क्यों नहीं थी… 3 दिन पहले संतोष तिवारी के साथ जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को दहला दिया। सिर पर हथौड़े से वार, पिस्टल की नोक और साढ़े तीन करोड़ की लूट! पुलिस ने 72 घंटे में आरोपियों को यूपी से पकड़ा, शॉर्ट एनकाउंटर भी हुआ। वाहवाही भी मिली। लेकिन असली सवाल तो ये है कि तिहाड़ जेल में बैठा अपराधी और यूपी का गैंग बिलासपुर में आकर दो महीने तक रेकी कैसे कर लेता है…क्या हमारी इंटेलिजेंस सो रही थी… क्या बाहरी अपराधियों का वेरिफिकेशन सिर्फ कागजों तक सीमित है…अगर पुलिस का खौफ होता, तो सीपत में दूसरी वारदात करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता….
एडिशनल एसपी कह रही हैं कि टीमें रवाना कर दी गई हैं। सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। लेकिन साहब, सीसीटीवी में अपराधियों के चेहरे तो दिख रहे हैं, पर पुलिस की पकड़ से वो दूर क्यों हैं…ग्रामीण इलाकों में पुलिस की गश्त सिर्फ कागजी खानापूर्ति क्यों बनकर रह गई है…जब अपराधी जानते हैं कि कच्चा रास्ता उन्हें बचा लेगा, तो पुलिस उन रास्तों पर जाल क्यों नहीं बिछाती…बिलासपुर के व्यापारियों में आज डर का माहौल है। सराफा एसोसिएशन पूछ रहा है कि हम व्यापार करें या अपनी जान बचाएं….पुलिस ने 72 घंटे में एक केस सुलझाया, ये अच्छी बात है, लेकिन दूसरी वारदात ने उस सफलता के जश्न को मातम में बदल दिया है। हम गृह मंत्री और बिलासपुर आईजी से सीधे सवाल पूछते हैं…क्या जनता को राम भरोसे छोड़ दिया गया है? क्या अपराधियों के पैर में लगी गोली सिर्फ एक दिखावा है, क्योंकि सड़कों पर नए अपराधी फिर से शिकार कर रहे हैं? बिलासपुर को जवाब चाहिए, न्याय चाहिए और सबसे बढ़कर सुरक्षा चाहिए….










