रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस फैसले के साथ ही अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% उपकर पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
आम जनता को सीधा फायदा
वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से आम लोग, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब संपत्ति खरीद-फरोख्त सस्ती और आसान हो जाएगी।
रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई आसान
सरकार के अनुसार:
- पंजीयन शुल्क में कमी आएगी
- रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल होगी
- ज्यादा लोग संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ राजस्व कमाना नहीं, बल्कि जनता का आर्थिक बोझ कम करना है।
पंजीयन सिस्टम में बड़े सुधार
सरकार ने हाल के समय में कई बदलाव किए हैं:
- स्वतः नामांतरण प्रणाली: रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण
- आधार आधारित सत्यापन: फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक
- सुगम मोबाइल ऐप: संपत्ति की सही लोकेशन सुनिश्चित
- स्मार्ट रजिस्ट्रेशन ऑफिस: AC, वाई-फाई, साफ सुविधाएं
परिवारों को बड़ी राहत
- परिवार में दान/बंटवारे पर शुल्क 0.8% से घटाकर सिर्फ 500 रुपये
- गाइडलाइन वैल्यू पर आधारित शुल्क, जिससे लागत कम
किसानों के लिए राहत
- कृषि भूमि पर अतिरिक्त मूल्यांकन खत्म
- दो-फसली, नकदी फसल, तालाब आदि पर अतिरिक्त भार हटाया गया
सरकार ने छोड़ा राजस्व
इस फैसले से सरकार को लगभग 150 करोड़ रुपये सालाना राजस्व का नुकसान होगा, लेकिन इसका सीधा फायदा जनता को मिलेगा।
क्यों हटाया गया उपकर?
यह उपकर पहले रोजगार योजनाओं और मितान क्लब के लिए लगाया गया था, लेकिन अब इनका खर्च सामान्य बजट से किया जा रहा है, इसलिए इसे खत्म कर दिया गया।
क्या होगा असर?
- संपत्ति खरीदना होगा सस्ता
- रियल एस्टेट में बढ़ेगी गतिविधि
- मध्यम वर्ग और किसानों को सीधा लाभ








