बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन विभाग और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचा है। टीम ने आरोपियों के पास से दो वयस्क तेंदुओं की खाल बरामद की है। पकड़े गए तस्कर उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
मुखबिर की सूचना पर बिछाया गया जाल
वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग तेंदुए की खाल बेचने की फिराक में यूपी और झारखंड से बलरामपुर की ओर आ रहे हैं। इस सूचना पर WCCB भोपाल, राज्य उड़न दस्ता और बलरामपुर वन मंडल की संयुक्त टीम ने 2 अप्रैल को बसंतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जमई में घेराबंदी की।
दो अलग-अलग कार्रवाई में 9 आरोपी दबोचे गए
कार्यवाही के दौरान टीम ने सबसे पहले बाइक सवार दो संदिग्धों को रोका। उनके पास मौजूद बैग की तलाशी लेने पर एक नग तेंदुए की खाल बरामद हुई। इसके बाद, टीम ने उनकी निशानदेही पर ‘ट्रैप’ बिछाकर घेराबंदी की और 7 अन्य सहयोगियों को भी धर दबोचा। इन आरोपियों के पास से एक और तेंदुए की खाल बरामद की गई।
तस्करी का नेटवर्क: यूपी, झारखंड और छत्तीसगढ़ के आरोपी शामिल
गिरफ्तार किए गए 9 आरोपी तीन अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं।
- झारखंड (गढ़वा): जगबीर सिंह और तेजबली प्रताप सिंह।
- उत्तर प्रदेश (सोनभद्र): राम प्रसाद और उमेश कुमार।
- छत्तीसगढ़ (सूरजपुर): श्यामसुन्दर, शिवधन, रामतरास और राहुल।
- छत्तीसगढ़ (बलरामपुर): गोरेलाल बोध।
बलरामपुर डीएफओ आलोक कुमार वाजपेयी ने बताया कि बरामद खाल पूर्ण रूप से वयस्क तेंदुओं की है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन तेंदुओं का शिकार छत्तीसगढ़ के जंगलों में हुआ है या पड़ोसी राज्यों में। पुलिस और वन विभाग अब ‘एंड-टू-एंड’ लिंक खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के सरगना तक पहुंचा जा सके।
सख्त कार्रवाई के बाद जेल भेजे गए आरोपी
तेंदुआ अनुसूची-1 का संरक्षित प्राणी है, जिसका शिकार या व्यापार करना संगीन अपराध है। वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई पूरी कर शुक्रवार को उन्हें जेल भेज दिया है। विभाग को संदेह है कि इस गिरोह में कुछ और स्थानीय शिकारी भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
“हमने संयुक्त अभियान चलाकर 9 लोगों को पकड़ा है। यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है जो खाल की बिक्री के लिए आया था। हम इस मामले में गहनता से जांच कर रहे हैं कि शिकार की लोकेशन क्या थी।”- आलोक कुमार वाजपेयी, डीएफओ, बलरामपुर









