Ghatasthapana Puja Items: शक्ति की आराधना का महापर्व, चैत्र नवरात्रि बस कुछ ही दिनों में दस्तक देने वाला है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व होता है. मान्यताओं के अनुसार, कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है और इसे स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यदि आप भी इस साल विधि-विधान से माता रानी का स्वागत करना चाहते हैं, तो अभी से पूजा सामग्री की पूरी तैयारी कर लें. आइए जानते हैं कलश स्थापना के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है.
नवरात्रि में क्यों की जाती है कलश स्थापना?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश को भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के पहले दिन घर या मंदिर में कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है. मान्यता है कि विधि-विधान से कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
कलश स्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री
मिट्टी का या तांबे का कलश
गंगाजल
आम या अशोक के पत्ते
नारियल
लाल कपड़ा या चुनरी
रोली और कुमकुम
अक्षत (चावल)
सुपारी
पान के पत्ते
लौंग और इलायची
हल्दी की गांठ
दूर्वा (घास)
सिक्के या दक्षिणा
जौ (ज्वारे बोने के लिए)
मिट्टी या रेत
फूल और माला
धूप, दीप और अगरबत्ती
ऐसे करें कलश स्थापना?
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ और पवित्र स्थान पर पूजा की तैयारी करें. सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और वहां लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बो दें. इसके ऊपर पानी से भरा हुआ कलश रखें और उसमें गंगाजल डालें. कलश में आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखें. नारियल को लाल कपड़े या चुनरी से लपेट दें. इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश की पूजा करें और दीप जलाएं.
कलश स्थापना का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. साथ ही मां दुर्गा की कृपा से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होने लगती हैं. इसलिए नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा की आराधना करना बेहद शुभ माना जाता है.










