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इजरायल-यूएस ने ईरान पर प्रीवेंटीव अटैक शुरू किया, तेहरान में धमाके

इजरायल-अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “प्रीवेंटीव अटैक” यानी एहतियाती सैन्य कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है. इजरायल के रक्षा मंत्री ने शनिवार सुबह इस ऑपरेशन की पुष्टि की. इसके साथ ही इजरायली सेना ने पूरे देश में “प्रोएक्टिव अलर्ट” जारी करते हुए सायरन बजाए, ताकि संभावित ईरानी मिसाइल हमलों से पहले लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें. सरकार ने नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है.

इसी बीच ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है. स्थानीय मीडिया और चश्मदीदों के मुताबिक, शहर के मध्य हिस्से में कम से कम तीन विस्फोट सुने गए, जिसके बाद दो और धमाकों की सूचना मिली. ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तरी तेहरान के सैय्यद खानदान इलाके में भी धमाकों की आशंका जताई गई है. हालांकि ईरानी अधिकारियों ने अब तक हमले की आधिकारिक पुष्टि या नुकसान के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है.

बताया जा रहा है कि ईरान में 30 जगहों पर हमला किया गया है. शुरुआती हमले में कहा जा रहा है कि ईरानी खुफिया एजेंसी की इमारतों, एयरपोर्ट्स, राष्ट्रपति भवन समेत रिहायशी इलाके में हमले किए गए हैं. इजरायली हमले के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इजरायल की तरफ से ईरान पर किए इस ऑपरेशन को “शील्ड ऑफ जूदा” नाम दिया गया है.

इजरायल में हाई अलर्ट, सायरन बजे

दूसरी तरफ इजरायल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. आईडीएफ ने बताया कि देशभर में सायरन बजाए गए हैं और मोबाइल फोन पर एडवांस अलर्ट भेजकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है. स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. दफ्तरों को भी बंद करने का ऐलान किया गया है. लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है.

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने राष्ट्रीय स्तर पर इमरजेंसी का ऐलान करते हुए चेतावनी दी कि इजरायल के नागरिक इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले की आशंका है. इजरायली सेना ने यह भी घोषणा की है कि देशभर के स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे, सार्वजनिक समारोहों पर रोक लगा दी गई है और लोगों को वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है.

ईरान-अमेरिका में परमाणु समझौते पर चल रही थी बातचीत

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया पहले से ही गहरे तनाव में है. जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक हवाई संघर्ष हुआ था. उस दौरान अमेरिका ने भी पहली बार सीधे तौर पर ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान में हिस्सा लिया था.

ईरान और अमेरिका के बीच फरवरी में परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता फिर से शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य दशकों पुराने विवाद का कूटनीतिक समाधान निकालना और सैन्य टकराव को टालना था. लेकिन इजरायल लगातार इस बात पर जोर देता रहा कि किसी भी संभावित समझौते में तेहरान की परमाणु संरचना को पूरी तरह ध्वस्त करना शामिल होना चाहिए, सिर्फ यूरेनियम संवर्धन रोकना पर्याप्त नहीं है. इजरायल ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी वार्ता में शामिल करने की मांग की थी.

ईरान ने कहा है कि वह प्रतिबंध हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं स्वीकार करने को तैयार है, लेकिन मिसाइल कार्यक्रम को किसी समझौते से जोड़ने से इनकार करता है. तेहरान ने यह भी साफ किया है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह आत्मरक्षा करेगा.

जून में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने कतर स्थित अल उदैद एयर बेस पर मिसाइलें दागी थीं, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है. पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है और भविष्य में परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता विकसित कर सकता है. हालांकि तेहरान परमाणु बम बनाने की मंशा से इनकार करता रहा है.

ताजा हमले ने एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है.

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