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होली पर चंद्रग्रहण, कहां दिखेगा, कब करें पूजा पाठ, क्या है सूतक काल, जानें

3 मार्च को साल का महत्वपूर्ण पूर्ण चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा लाल रंग में नजर आएगा, जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है, तब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है।


ग्रहण का समय

दिल्ली के प्रसिद्ध कल्काजी मंदिर के महंत पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार,

  • ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे
  • ग्रहण समाप्त: शाम 6:57 बजे

ज्योतिषीय गणना के अनुसार:

  • सूतक काल की शुरुआत: सुबह 9:39 बजे (ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले)
  • सूतक काल समाप्त: ग्रहण समाप्ति के साथ

कहां दिखेगा चंद्रग्रहण?

अगर मौसम साफ रहा तो यह खगोलीय नजारा देश के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा।

पूर्वोत्तर भारत में दृश्यता बेहतर रहने की संभावना है, खासकर:

  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • मणिपुर
  • नागालैंड
  • मिजोरम

इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता से भी इसे देखा जा सकेगा, हालांकि यहां दृश्यता थोड़ी कम स्पष्ट हो सकती है। इसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं है। नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।


चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है?

जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ता (प्रकीर्णित करता) है।

  • नीली रोशनी (कम तरंगदैर्ध्य) बिखर जाती है
  • लाल रोशनी (अधिक तरंगदैर्ध्य) चंद्रमा तक पहुंचती है

इसी प्रक्रिया को ‘रेले प्रकीर्णन’ (Rayleigh Scattering) कहा जाता है।यही कारण है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या नारंगी दिखाई देता है।

वायुमंडल में धूल की मात्रा के आधार पर लाल रंग की तीव्रता बदल सकती है-

  • अधिक धूल = गहरा लाल
  • कम धूल = हल्का नारंगी

🕉 धार्मिक मान्यताएं और सूतक काल

शास्त्रों में चंद्रग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है।

  • सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
  • पूजा-पाठ नहीं किया जाता।
  • ग्रहण के बाद स्नान, गंगाजल छिड़काव और दान-पुण्य का विधान है।

लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार:

  • ग्रहण काल में मंत्र जाप और मानसिक पूजा श्रेष्ठ मानी गई है।
  • ग्रहण के बाद घर की शुद्धि और स्नान करना चाहिए।
  • 4 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा।

राशियों पर प्रभाव (ज्योतिष अनुसार)

  • सिंह, कन्या, कुंभ: विशेष सावधानी
  • मेष, मिथुन: समय शुभ

हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है और इसका स्वास्थ्य या दैनिक जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।


क्यों हर बार पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं होता?

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के मुकाबले लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसी कारण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा हर पूर्णिमा पर एक सीध में नहीं आते आने वाले छह चंद्रग्रहणों में चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आंशिक रूप से प्रवेश करेगा, पूर्ण रूप से नहीं।


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