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CG NEWS: महंत राजू दास ने साधु-संतों को राजनीतिक एजेंट बताने पर पूर्व सीएम को लपेटा, कहा- भूपेश बघेल रावण का दूसरा रुप

दुर्ग। भिलाई के जयंती स्टेडियम में आयोजित पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा आज अपने समापन चरण में है। 25 दिसंबर से चल रही इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा पर समाज में अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगाए थे।

पूर्व सीएम बघेल ने बेमेतरा के सिरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि दोनों संत छत्तीसगढ़ के अन्य संतों के सामने शास्त्रार्थ करके दिखाएं। उनके इस बयान ने राजनीतिक पारा गर्म कर दिया है। बीजेपी और संत समाज दोनों ही इस बयान से नाराज हैं।

महंत राजू दास का कड़ा बयान

हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत राजू दास दुर्ग पहुंचे और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मिलने के बाद स्पष्ट किया कि साधु-संत हमेशा सनातन धर्म और समाज कल्याण के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बयान को आलोचनात्मक अंदाज में देखा और कहा,

“पूर्व सीएम भले ही एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन ईसाई मिशनरियों से प्रेरित होकर इस तरह के अनर्गल बयान दे रहे हैं।”

महंत राजू दास ने कहा कि ईसाई मिशनरियों पर सरकार की सख्ती के कारण उनके कार्य प्रभावित हो रहे हैं और ऐसे लोग जानबूझकर साधु-संतों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग सनातन धर्म और राष्ट्रवाद की लौ जलाने वालों को निशाने पर ले रहे हैं।

महात्मा गांधी और राम राज्य की बात

महंत राजू दास ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मिलने के बाद कहा कि महात्मा गांधी ने राम राज्य की कल्पना की थी और आज संत समाज उसी राम राज्य की बात कर रहा है। उन्होंने भूपेश बघेल पर कटाक्ष करते हुए कहा,

“क्या कांग्रेस पार्टी अब अपने ही आदर्श महात्मा गांधी को नहीं मानती?”

संतों के अपमान और राजनीतिक एजेंट बताने पर प्रतिक्रिया

पूर्व सीएम भूपेश बघेल द्वारा साधु-संतों को राजनीतिक एजेंट बताने पर महंत राजू दास ने कहा,

“रावण भी महान पंडित था, वेदों का ज्ञाता था, लेकिन अंततः उसका मार्ग गलत था। केवल विद्वान या परंपरा से होना पर्याप्त नहीं, यह भी देखना चाहिए कि व्यक्ति किस विचारधारा और उद्देश्य के लिए कार्य कर रहा है। आज विभिन्न स्थानों पर साधु-संत जनकल्याण और मानसिक शांति के लिए कार्य कर रहे हैं, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में। ऐसे में उन्हें किसी पार्टी का एजेंट कहना पूरी तरह गलत और निंदनीय है।”

महंत राजू दास ने अपील की कि राजनीतिक बयानबाजी करते समय सनातन परंपरा और संत समाज का सम्मान बनाए रखा जाए क्योंकि यह आस्था का विषय है, राजनीति का नहीं।


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