महासमुंद। छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला नशा तस्करों के लिए एक बार फिर काल साबित हुआ है। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए ‘एम्बुलेंस’ को अपना हथियार बनाया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने करोड़ों के काले कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने एक निजी एम्बुलेंस से 520 किलो गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 2 करोड़ 60 लाख रुपये आंकी गई है।
ओडिशा से महाराष्ट्र जा रही थी ‘नशे की एम्बुलेंस’
पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि भवानीपटना (ओडिशा) से एक एम्बुलेंस गांजा भरकर नागपुर (महाराष्ट्र) की ओर जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने टेमरी चेक पोस्ट पर घेराबंदी की। जैसे ही संदिग्ध एम्बुलेंस पहुंची, उसकी तलाशी ली गई। एम्बुलेंस के भीतर मरीजों की जगह गांजे के पैकेट ठूस-ठूस कर भरे हुए थे।
तीनों आरोपी महाराष्ट्र के निवासी
पकड़े गए तीनों तस्कर महाराष्ट्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें नारकोटिक एक्ट (NDPS Act) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड और नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
राजनांदगांव में ‘महतारी एक्सप्रेस’ से शराब की तस्करी
एम्बुलेंस का दुरुपयोग सिर्फ महासमुंद तक सीमित नहीं है। हाल ही में राजनांदगांव जिले के छुरिया थाना क्षेत्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। वहां पुलिस ने महतारी एक्सप्रेस (102 एम्बुलेंस) के रूप में इस्तेमाल होने वाले बोलेरो वाहन को अवैध शराब परिवहन करते पकड़ा था।।
क्यों एम्बुलेंस बन रही तस्करों की पसंद?
तस्करों का मानना है कि आपातकालीन वाहन होने के कारण पुलिस एम्बुलेंस को आसानी से नहीं रोकती और न ही उसकी तलाशी लेती है। इसी का फायदा उठाकर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों से नशे की बड़ी खेप दूसरे राज्यों में भेजी जा रही है।










