खैरागढ़: खैरागढ़ जिला कलेक्टरेट परिसर सोमवार को उस समय छावनी में तब्दील हो गया, जब एक अधेड़ व्यक्ति ने प्रशासन के सामने खुद पर मिट्टी तेल छिड़क कर जान देने की कोशिश की। इस अचानक हुई घटना से परिसर में मौजूद अधिकारियों और आम जनता के बीच हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित को आग लगाने से रोक लिया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आत्मघाती कदम उठाने वाले व्यक्ति की पहचान कटंगी (गंडई) निवासी शीतलाल निर्मलकर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शीतलाल लंबे समय से अपने ही गांव में सामाजिक बहिष्कार (हुक्का-पानी बंद) का दंश झेल रहा था।
“पीड़ित ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण वह गहरे मानसिक तनाव और हताशा में था।”
पुलिस की सक्रियता से टला बड़ा हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शीतलाल अचानक कलेक्टरेट पहुंचा और अपने ऊपर मिट्टी तेल उड़ेल लिया। इससे पहले कि वह माचिस जला पाता, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों ने उसे दबोच लिया। छीना-झपटी के दौरान पीड़ित को मामूली चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पीड़ित को सुरक्षा घेरे में लिया और पुलिस वाहन से स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक पीड़ित की हालत फिलहाल स्थिर है। वह खतरे से बाहर है और उसका प्राथमिक उपचार कर दिया गया है। प्रशासन अब इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है कि आखिर क्यों उसकी शिकायतों पर पहले ध्यान नहीं दिया गया।
खैरागढ़ प्रशासन के लिए चुनौती: यह घटना सीधे तौर पर सामाजिक कुरीतियों और प्रशासनिक सुस्ती की ओर इशारा करती है। यदि समय रहते सामाजिक बहिष्कार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कार्रवाई की जाती, तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती।








