रायपुर। कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह की पुलिस रिमांड समाप्त हो गई है। चार दिनों तक चली गहन पूछताछ के बाद रायपुर पुलिस ने उसे आज अदालत में पेश किया, जहां कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके तहत अब आरोपी गैंगस्टर मयंक सिंह 9 जनवरी तक जेल में न्यायिक हिरासत में रहेगा। कोर्ट के फैसले की जानकारी बचाव पक्ष के वकील दीपांकर बनर्जी ने मीडिया को दी।
चार दिन की रिमांड में कई बड़े खुलासे
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान मयंक सिंह से कई गंभीर आपराधिक मामलों को लेकर पूछताछ की गई। जांच में सामने आया है कि मयंक सिंह अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए इंटरनेट कॉल और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करता था। वह धमकी भरे संदेश भेजने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेता था, ताकि पुलिस उसे ट्रैक न कर सके।
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि मयंक सिंह ने अपने गैंग के संचालन के लिए अलग-अलग शहरों और वारदातों के लिए विशेष कोड वर्ड्स तैयार कर रखे थे। इन्हीं कोड वर्ड्स के जरिए वह अपने गुर्गों को निर्देश देता था, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि मयंक सिंह का आपराधिक नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था। उसका नेटवर्क झारखंड, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, हर शहर और हर टारगेट के लिए अलग-अलग संकेत और कोड तय किए गए थे। इससे साफ है कि गैंग का संचालन बेहद संगठित और योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था।
रामगढ़ जेल से लाया गया था रायपुर
गौरतलब है कि मयंक सिंह को झारखंड की रामगढ़ जेल से ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया था। मयंक सिंह मूल रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र की पुरानी मंडी का निवासी है। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि राजस्थान का रहने वाला यह आरोपी झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इतना मजबूत आपराधिक नेटवर्क कैसे खड़ा कर पाया।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तार
पुलिस जांच में मयंक सिंह के तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि मयंक सिंह और लॉरेंस बिश्नोई के बीच भौगोलिक और सामाजिक संपर्क रहा है।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 12 फरवरी 1993 को पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारावाली गांव में हुआ था, जबकि मयंक सिंह का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में हुआ। फाजिल्का और घड़साना के बीच की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है। पुलिस का मानना है कि इसी भौगोलिक नजदीकी के चलते मयंक सिंह की बिश्नोई गैंग में एंट्री आसान हुई और धीरे-धीरे उसने आपराधिक दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत की।
आगे भी जारी रहेगी जांच
रायपुर पुलिस के अनुसार, मयंक सिंह से हुई पूछताछ के आधार पर उसके नेटवर्क, फंडिंग और संपर्कों को लेकर आगे की जांच जारी रहेगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में हुई किन-किन आपराधिक वारदातों में उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हाथ रहा है।
फिलहाल मयंक सिंह को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।








