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इंडिगो की 3450 से अधिक उड़ानें रद्द: छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने कंपनी को भेजा लीगल नोटिस, मांगा 10 गुना मुआवजा

रायपुर। इंडिगो एयरलाइंस द्वारा पिछले छह दिनों में देशभर में 3450 से अधिक उड़ानें रद्द किए जाने के बाद यात्रियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इंडिगो एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कानूनी नोटिस जारी किया है। सोसायटी का कहना है कि यह कदम यात्रियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और भारतीय कानूनों तथा नागरिक उड्डयन नियमों की खुली अवहेलना है।

सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी के अनुसार, इंडिगो ने बिना किसी पूर्व सूचना और पारदर्शी कारण बताए मनमाने ढंग से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ बाधित कीं। इस वजह से यात्रियों को भारी आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और समय की क्षति उठानी पड़ी। प्रभावित लोगों में वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ, बच्चे, रोगी और व्यवसायी बड़ी संख्या में शामिल हैं। सोलंकी ने कहा कि कई यात्रियों के लिए अचानक फ्लाइट रद्द होना किसी आपदा से कम नहीं था।

नोटिस में छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने स्पष्ट कहा है कि “इंडिगो का यह कृत्य भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, विमानन नियम तथा DGCA के दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है।” इसे ‘घोर अनुबंधभंग’ और ‘सेवा में कमी’ का मामला बताते हुए सोसायटी ने एयरलाइन को आदेशित किया है कि वह प्रत्येक प्रभावित यात्री को टिकट मूल्य का कम से कम 10 गुना मुआवजा और होटल, वैकल्पिक यात्रा, मेडिकल खर्च सहित सभी प्रत्यक्ष नुकसान की प्रतिपूर्ति 5 दिनों के भीतर सुनिश्चित करे। इसके साथ एयरलाइन से बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द करने के वास्तविक कारणों का सार्वजनिक खुलासा करने की भी मांग की गई है।

सोसायटी ने बताया कि इस मामले में पीड़ित यात्रियों की ओर से प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री को विस्तृत शिकायत भेज दी गई है। शिकायत में DGCA द्वारा विशेष जांच, इंडिगो पर 9000 करोड़ रुपये का जुर्माना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग शामिल है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में मुआवजा और जवाबदेही तय नहीं होती है, तो सोसायटी सामूहिक कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी, जिसमें शामिल हैं—

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में सामूहिक याचिका
  • सिविल कोर्ट में अनुबंधभंग और हर्जाने का दावा
  • DGCA व अन्य प्राधिकरणों के समक्ष आपराधिक शिकायत

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