कवर्धा। कहते हैं नाम सिर्फ पहचान नहीं होता, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक गरिमा से भी जुड़ा होता है। कवर्धा जिले के एक छोटे से गांव ने इस सच्चाई को अब महसूस किया है। वर्षों से चंडालपुर नाम से पहचाने जाने वाले इस गांव को अब आधिकारिक रूप से “चंदनपुर” नाम मिल गया है। राज्य शासन द्वारा राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होते ही गांव में उत्सव का माहौल बन गया।
गांव की गलियों में मिठाइयां बांटी गईं, ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी और हर चेहरे पर राहत व खुशी साफ नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने नाम के कारण उन्हें लंबे समय तक सामाजिक असहजता का सामना करना पड़ा। पढ़ाई, नौकरी या अन्य काम से बाहर जाने पर गांव का नाम बताते ही ताने और मजाक झेलना पड़ता था, जिससे खासकर युवाओं को मानसिक पीड़ा होती थी। कई लोग तो गांव का नाम बताने से भी बचने लगे थे।
अब चंदनपुर नाम मिलने से ग्रामीणों में नया आत्मविश्वास लौटा है। ग्रामीणों के अनुसार, “चंदन” शब्द पवित्रता, सुगंध और सम्मान का प्रतीक है, जो गांव की नई पहचान को सार्थक बनाता है। यह नाम बच्चों और युवाओं को गर्व के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे ग्रामीणों की वर्षों की सतत मांग और सामूहिक प्रयास रहे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष लगातार अपनी पीड़ा रखने के बाद अंततः शासन स्तर पर प्रक्रिया पूरी हुई और गांव को नई पहचान मिली। ग्रामीण इसे अपनी सामूहिक जीत मान रहे हैं।
विधायक विजय शर्मा के प्रति जताया आभार
गांववासियों ने इस फैसले के लिए क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक ने उनकी भावनाओं को समझते हुए शासन स्तर पर पहल की और नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया। उनके अनुसार यह सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों लोगों के आत्मसम्मान को लौटाने वाला कदम है।
आज चंदनपुर के हर आंगन में खुशी है। महिलाएं एक-दूसरे को मिठाई खिला रही हैं, युवा नए सपनों की बातें कर रहे हैं और बुजुर्ग बीते दिनों की पीड़ा को पीछे छोड़ नई शुरुआत का आशीर्वाद दे रहे हैं। चंदनपुर अब केवल एक नया नाम नहीं, बल्कि सम्मान और सकारात्मक सामाजिक सोच का प्रतीक बन गया है।








