छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 59 निजी अस्पतालों को योजना की सूची से बाहर कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीज इलाज नहीं करा सकेंगे।
यह कार्रवाई आयुष्मान भारत योजना की राज्य नोडल एजेंसी द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के आधार पर की गई है। बताया गया है कि संबंधित अस्पतालों ने निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके चलते उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।
जानकारी अपडेट नहीं करने पर गिरी गाज
NHA के निर्देशानुसार योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य था। इसके लिए अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी।
हालांकि, कई बार रिमाइंडर और स्मरण पत्र भेजे जाने के बावजूद इन अस्पतालों ने न तो जानकारी अपडेट की और न ही पोर्टल पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया। इसके चलते यह कार्रवाई की गई।
तीन श्रेणियों में की गई कार्रवाई
राज्य स्तर पर समीक्षा के बाद अस्पतालों पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में कार्रवाई की गई है:
1. 21 अस्पताल – आवेदन ही नहीं किया, सीधे निलंबन
प्रदेश के 21 निजी अस्पताल ऐसे पाए गए जिन्होंने तय समय सीमा में आवेदन प्रक्रिया पूरी ही नहीं की। ऐसे अस्पतालों को आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।
इनमें रायपुर के सबसे ज्यादा अस्पताल शामिल हैं, जैसे – जौहरी हॉस्पिटल, महादेव हॉस्पिटल, शिवम हॉस्पिटल, सौभाग्य हॉस्पिटल, सिद्धि विनायक हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल, वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल सहित कई अन्य।
2. 12 अस्पताल – जानकारी अपडेट नहीं की, जवाब भी नहीं दिया
प्रदेश के 12 अस्पतालों को इसलिए सूची से बाहर किया गया क्योंकि उन्होंने न तो अपनी जानकारी अपडेट की और न ही प्राधिकरण द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दिया।
इस श्रेणी में भी रायपुर के कई अस्पताल शामिल हैं जैसे – श्री दानी केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, श्री कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, श्री महावीर हॉस्पिटल, कालड़ा नर्सिंग होम, प्रज्ञा हॉस्पिटल, लाइफ केयर हॉस्पिटल आदि।
3. 26 अस्पताल – अधूरे दस्तावेज, भुगतान और प्री-ऑथ रोका गया
26 अस्पताल ऐसे पाए गए जिनके दस्तावेज अधूरे थे और उन्होंने दोबारा आवेदन भी नहीं किया।
इन अस्पतालों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनका भुगतान और प्री-ऑथ (इलाज की पूर्व अनुमति) रोक दिया गया है।
इस सूची में भी रायपुर के सबसे अधिक अस्पताल शामिल हैं, जैसे – पांडे नर्सिंग होम, वैदेही हॉस्पिटल, ममता हॉस्पिटल, रायपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, रावतपुरा सरकार हॉस्पिटल, छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल सहित अन्य।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी हाल ही में 120 से अधिक अस्पतालों को सूची से हटाया गया था, जहां NABH पात्रता का मुद्दा सामने आया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों की संख्या सीमित रखना चाहती है, क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले ढाई साल में कई बार निजी अस्पतालों को 6 महीने से अधिक भुगतान लंबित रहने के कारण काम बंद करने की स्थिति बनी है।
क्या पड़ेगा असर?
इस कार्रवाई का सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जो आयुष्मान योजना के तहत इन अस्पतालों में इलाज कराते थे। अब उन्हें अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों का रुख करना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगे भी नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।










