गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश सीमा से लगे अमरकंटक क्षेत्र की शांत पहाड़ियों में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब अवैध रेत से लदी गाड़ियों का पीछा करते हुए वन विभाग की टीम का आमना-सामना रेत माफियाओं से हो गया। पूरा घटनाक्रम किसी एक्शन फिल्म के दृश्य जैसा नजर आया, जहां तेज रफ्तार वाहन, घेराबंदी, चीखती ब्रेकें और जान जोखिम में डालकर की गई कार्रवाई देखने को मिली।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने अमरकंटक बॉर्डर क्षेत्र में मोर्चा संभाला। कुछ ही देर में अवैध रेत से भरी गाड़ियां नजर आईं। टीम द्वारा रास्ता रोके जाने पर खुद को घिरा देख तस्कर बौखला गए और गाड़ियों की रफ्तार तेज कर दी। आरोप है कि तस्करों ने वनकर्मियों को कुचलने तक की कोशिश की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
गाड़ियां छोड़कर फरार हुए तस्कर
बताया जा रहा है कि जब्त की गई गाड़ियां अमरकंटक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रेत कारोबारी मोहम्मद इब्राहिम से जुड़ी हुई हैं। पीछा और घेराबंदी के दौरान हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। तस्करों द्वारा हमला करने की कोशिश के बावजूद वन विभाग की टीम ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए एक रेत से लदी ट्रक और एक कार को मौके पर जब्त कर लिया। तस्कर गाड़ियां छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज
घटना की पुष्टि करते हुए गौरेला रेंज के रेंजर प्रबल दुबे ने बताया कि यह मामला अंतरराज्यीय रेत तस्करी से जुड़ा हुआ है। पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अमरकंटक बॉर्डर पर हुई यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि अवैध रेत कारोबार किस हद तक बेलगाम हो चुका है। वहीं, इसे रोकने के लिए वन विभाग की टीम भी पूरी मजबूती और जांबाजी के साथ मैदान में डटी हुई है।







