रायपुर | उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों और शोधार्थियों (Research Scholars) के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यदि आप यूजीसी के माध्यम से किसी भी तरह की स्कॉलरशिप या फेलोशिप का लाभ ले रहे हैं, तो अब आपके लिए आधार नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भुगतान केवल आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम (ABPS) के जरिए ही किया जाएगा।
क्या है नया नियम और क्यों हुआ बदलाव?
यूजीसी ने पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों को खत्म करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। अब फेलोशिप की राशि सीधे छात्र के उस बैंक खाते में जाएगी जो आधार से लिंक होगा। इसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के तहत लागू किया गया है। इस सिस्टम से यह सुनिश्चित होगा कि पैसा सीधे और सुरक्षित तरीके से सही लाभार्थी तक पहुंचे।
15 अप्रैल 2026 तक का है समय
यूजीसी ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक सख्त समय सीमा (Dead-line) निर्धारित की है:
- छात्रों के लिए अंतिम तिथि: सभी छात्रों को 15 अप्रैल 2026 तक अपना आधार नंबर बैंक खाते से लिंक करना और पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य है।
- सत्यापन की तिथि: संस्थानों के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 20 अप्रैल 2026 तक सभी विवरणों की जांच कर उन्हें अप्रूव कर दें।
चेतावनी: यदि निर्धारित तिथि तक आधार लिंक और अपडेट की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में मिलने वाली स्कॉलरशिप या फेलोशिप की राशि बीच में ही अटक सकती है।
छात्रों को क्या करना होगा? (Step-by-Step)
- बैंक जाएं: सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका आधार कार्ड आपके सक्रिय बैंक खाते से जुड़ा (Seeded) है।
- पोर्टल पर अपडेट: स्कॉलरशिप एंड फेलोशिप मैनेजमेंट पोर्टल पर लॉग-इन करें और अपनी आधार जानकारी दर्ज करें।
- विवरण मिलान: सुनिश्चित करें कि आधार कार्ड और बैंक खाते में आपका नाम और अन्य विवरण एक समान हों।
- सहायता: यदि प्रक्रिया में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो पोर्टल पर दिए गए ‘स्टेप-बाय-स्टेप’ गाइड की मदद लें या यूजीसी द्वारा जारी आधिकारिक ईमेल पर संपर्क करें।
नोडल अधिकारियों को विशेष निर्देश
यूजीसी ने देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के नोडल अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। उन्हें 20 अप्रैल तक डेटा सत्यापन का काम पूरा करना होगा ताकि नए वित्तीय वर्ष के बजट सत्र में भुगतान की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
निष्कर्ष: यह बदलाव उन छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जिनका आधार अपडेट नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में यह सिस्टम फेलोशिप वितरण में होने वाली देरी और गड़बड़ियों को खत्म करने में मददगार साबित होगा।










