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CG NEWS: अंधविश्वास ने ली जान: टोनही के शक में हत्या महिला की नृशंस हत्या

नारायणपुर: जिले के सोनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम इरपानार में अंधविश्वास और जादू-टोना के संदेह ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार किया है. अंधविश्वास और टोनही के शक में 48 साल की महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई. महिला की नृशंस हत्या से पूरे गांव में सनसनी फैल गई.

अंधविश्वास और टोनही के शक में महिला की बेरहमी से हत्या

हत्याकांड का खुलासा 31 दिसंबर के दिन हुआ. सोनपुर पुलिस ने घटना को लेकर देर रात लगभग 10 बजे मीडिया को इसकी जानकारी दी. सोनपुर पुलिस के मुताबिक, 30 दिसंबर 2025 की शाम लगभग 7 बजे ग्राम इरपानार निवासी लक्ष्मण मेटामी, अपने साले सोमारु वड्डे के घर आग तापने गया हुआ था. उस दौरान दौरान उसकी पत्नी शैली बाई मेटामी घर में अकेली थी.

घर में घुसकर हत्याकांड को दिया अंजाम

आरोप है कि मृतक महिला जब घर में अकेली थी, तब मुख्य आरोपी पंडी राम वड्डे अपने साथियों के साथ जबरन मृतका के घर में घुस गया. आरोपी ने महिला पर जादू-टोना करने का आरोप लगाते हुए उसे पीटना शुरू कर दिया. डंडे और फरसे के बेंट से उसपर घातक वार किए गए, जिससे महिला अचेत होकर गिर पड़ी.

घटनास्थल पर हो गई महिला की मौत

गंभीर चोटों और ज्यादा खून बह जाने की वजह से महिला शैली बाई मेटामी की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की सूचना मिलने पर परिजनों ने थाना सोनपुर पहुंचकर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई. प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या की वजह अंधविश्वास और टोनही का शक था.

अपराध दर्ज, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103, 3(5) एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराध क्रमांक 12/2025 पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है. सोनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पंडी राम वड्डे को बुधवार देर रात हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी अंचलों में फैले अंधविश्वास की भयावह तस्वीर सामने रख दी है. इस हत्याकांड के बाद लोग दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

टोनही प्रथा निवारण अधिनियम

छत्तीसगढ़ टोनही प्रथा निवारण अधिनियम, 2005 का उद्देश्य टोनही से संबंधित कृत्यों को रोकना और दंडित करना है, जो पारंपरिक या अंधविश्वासी प्रथाओं को संदर्भित करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे नुकसान या चोट पहुंचाते हैं, जो अक्सर भूत-प्रेत या इसी तरह के अनुष्ठानों से जुड़े होते हैं. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए शासन की ओर से जन जागरुकता अभियान भी समय समय पर चलाया जाता है.

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