नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने की मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इस बड़े रक्षा सौदे को सहमति प्रदान की गई। रक्षा सूत्रों के अनुसार यह डिफेंस डील लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की होगी।
सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए ‘Acceptance of Necessity’ (AON) जारी कर दी है। इस खर्च का लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये सीधे विमानों की खरीद पर खर्च किया जाएगा, जबकि शेष राशि हथियार प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर खर्च होगी। माना जा रहा है कि इस सौदे से भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या और सामरिक क्षमता में काफी मजबूती आएगी।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी निर्णय लिया है कि 6 P-8I समुद्री गश्ती विमानों को भी खरीदा जाएगा, जिनकी अनुमानित लागत 28 हजार करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम्स पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन सिस्टम्स का उपयोग खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों में होगा तथा भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमता को नया बल मिलेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, 114 राफेल विमानों में से 18 विमान फ्रांस से तैयार अवस्था में आएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी।
इस सौदे के साथ ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी, जिसमें वर्तमान में उपलब्ध 36 पुराने, 114 नए तथा भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल शामिल होंगे। राफेल की सबसे बड़ी ताकत उसकी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है, जिसमें Meteor हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल शामिल है, जिसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है।
अब ‘AON’ मिलने के बाद औपचारिक बातचीत और कीमतों पर अंतिम निर्णय शुरू होगा। अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति (CCS) द्वारा दी जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों की डिलीवरी 2030 तक शुरू हो सकती है।








