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ऑपरेशन सिंदूर US रिपोर्ट पर हंगामा: कांग्रेस ने पूछा, क्या मोदी, MEA ऑपरेशन सिंदूर में ‘पाकिस्तान की सफलता’ के दावे पर आपत्ति करेंगे?

अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) की वार्षिक रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत में नए सियासी विवाद ने जोर पकड़ लिया है। रिपोर्ट में किए गए कुछ दावों ने भारत-पाकिस्तान के मई 2025 के चार दिवसीय संघर्ष को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट में लिखा गया है कि पाकिस्तान ने इस संघर्ष में भारत पर बढ़त बनाई, और चीन ने इस पूरे घटनाक्रम का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान को सैन्य सहयोग, आधुनिक हथियार और दुष्प्रचार अभियान के माध्यम से समर्थन दिया। इससे भारत की विदेश नीति और सुरक्षा दावों को चुनौती मिलती दिख रही है।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की सालाना रिपोर्ट कूटनीति के लिए “एक बड़ा झटका” है, क्योंकि इस रिपोर्ट में पहलगाम आतंकी हमले को “विद्रोही हमला” बताया गया है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की भारत पर बढ़त का इशारों-इशारों में ज़िक्र किया गया है।

एक्स पर जयराम रमेश ने लिखा, अमेरिका की यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन ने अभी-अभी अपनी वार्षिक रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी है। अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई इस कमीशन में बारह स्वतंत्र सदस्य होते हैं। 2025 की यह वार्षिक रिपोर्ट लगभग 800 पन्नों की है। इसके पेज 108 और 109 में जो लिखा है, वह हैरान करने वाला है और समझ से परे है। जयराम रमेश ने बताया कि इसमें अप्रैल 2025 में पाकिस्तान द्वारा कराए गए पहलगाम आतंकी हमले को ‘विद्रोही हमला (insurgent attack)’बताया गया है। रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान के चार दिन के संघर्ष को भारत के खिलाफ ‘पाकिस्तान की सैन्य सफलता’ कहा गया है।

जयराम रमेश ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच “मध्यस्थता” वाले दावे की याद दिलाते हुए, पीएम मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप अब तक 60 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को रोक दिया था। प्रधानमंत्री इस बारे में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। अब अमेरिकी कांग्रेस के यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी कमीशन की यह रिपोर्ट आई है, जो भारत के लिए एकदम अस्वीकार्य है। क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस पर आपत्ति और विरोध दर्ज कराएंगे? हमारी कूटनीति को एक और गंभीर झटका लगा है।

अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की इस सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने कैसे पाकिस्तान के सैन्य संकट का “मौक़ापरस्ती से” इस्तेमाल किया और अपनी रक्षा क्षमताओं को परखने की कोशिश की। रिपोर्ट ने पहलगाम की घटना को आतंकी हमला मानने के बजाय भारत-पाकिस्तान के चार दिन के टकराव को इस तरह बताया कि यह “भारत द्वारा एक घातक बाग़ी हमले के जवाब में शुरू हुआ, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विवादित इलाके में 26 आम लोगों की मौत हुई।” 

रिपोर्ट में कहा गया, “पाकिस्तान ने भारत के फ्रेंच रफ़ाल लड़ाकू विमानों को गिराने के लिए चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया। इसी बात को चीन के दूतावास ने अपने हथियार बेचने की कोशिशों में खास तौर पर उछाला। जबकि रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सिर्फ तीन लड़ाकू विमान ही गिराए गए थे, और हो सकता है कि वे तीनों रफ़ाल न हों। फ्रेंच ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि चीन ने रफ़ाल की बिक्री को नुकसान पहुँचाने और अपने J-35 लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देने के लिए एक फर्ज़ी सूचना अभियान चलाया। चीन ने नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स से एआई और वीडियो गेम की बनाई हुई तस्वीरें फैलाईं, जिन्हें वह उन विमानों का ‘मलबा’ बता रहा था, जिन्हें उसके हथियारों ने कथित तौर पर गिराया था।”

भारत-चीन रिश्तों पर बात करते हुए रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की चीन यात्रा ऐसे समय में हुई, जब ट्रंप ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाया था और इसको लेकर “तनाव” बना हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, “तियानजिन में 2025 का SCO शिखर सम्मेलन पीएम मोदी की 2020 की झड़प के बाद चीन की पहली यात्रा थी। ये दौरा इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि अमेरिका के साथ भारत की टैरिफ वार्ताओं में खिंचाव चल रहा था। शी जिनपिंग और मोदी की एक निजी मुलाकात भी हुई, जिसमें दोनों ने अगस्त में चीनी विदेश मंत्री वांग और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच हुए समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत और चीन ने तय किया कि वे ऊँचले स्तर की बातचीत बढ़ाएंगे, सीमा पर तनाव कम करने के लिए समझौते की दिशा में काम करेंगे, आर्थिक सहयोग बढ़ाएंगे, दोनों देशों के बीच उड़ानें फिर से शुरू करेंगे और भारतीय नागरिकों के लिए तिब्बती क्षेत्रों की तीर्थ यात्राओं की अनुमति 2026 तक बढ़ाएंगे। इससे साफ होता है कि दोनों नेता दूरियाँ घटाकर रिश्तों को सुधारने के इच्छुक हैं।”

बहरहाल, अमेरिका चीन की इस पूरी रिपोर्ट के बाद सवाल अब और भी बड़ा हो गया है कि जब ये रिपोर्ट भारत की सैन्य क्षमता, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि पर इतने गंभीर सवाल खड़े करती है…जब ट्रंप बार-बार सीज़फायर का श्रेय खुद को देते रहे…और जब पाकिस्तान को भारत से ज्यादा मजबूत दिखाने वाली बातें खुलेआम लिखी जा रही हैं…तब प्रधानमंत्री मोदी की ये चुप्पी आखिर क्या संदेश दे रही है? क्या ये कूटनीतिक रणनीति है या फिर कोई मजबूरी?

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