जी-7 नेताओं की आखिरी दिन की बैठक के दौरान बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान वायरल हो रहा है. इस दौरान राष्ट्रपति को “आई एम द बॉस” (मैं ही बॉस हूं) कहते हुए सुना जा रहा है. दरअसल, यह वीडियो उस समय का है, जब ट्रंप बैठक के लिए पेरिस के एक रिजॉर्ट में पहुंचे थे. बैठक कक्ष में पहुंचते ही उन्होंने सभी नेताओं की ओर देखते हुए कहा, “आई एम द बॉस.” इसके बाद ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की पीठ भी थपथपाई.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बैठक में ट्रंप सबसे आखिर में पहुंचे थे. जब वह पहुंचे, तब बैठक कक्ष में सभी प्रमुख नेता पहले से मौजूद थे. उन्होंने आते ही मजाकिया अंदाज में खुद को “बॉस” बताया.
ट्रंप का यह बयान अहम क्यों?
जी-7 देशों को इस समय अमेरिका की जरूरत है. एक तरफ यूरोपीय देश रूस से परेशान हैं, वहीं जापान जैसे देश चीन के बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं. जी-7 की बैठक में सदस्य देशों ने रूस पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया है.
इसके अलावा अमेरिका ने यूक्रेन को 1 अरब डॉलर की सहायता राशि उपलब्ध कराने की बात कही है. वहीं यूक्रेन को हथियार बनाने की परमिशन भी दी जाएगी.
जी-7 मीटिंग में शामिल रहे ये नेता
पेरिस में आयोजित जी-7 मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्ररति ट्रंप के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर मर्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जापान की प्रधानमंत्री सना तकाएची मौजूद रहे.
इसके अलावा बैठक में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान, कतर के अमीर थानी, मिस्र के अल सीसी को भी आमंत्रित किया गया था.
जी-7 देशों की बैठक अहम क्यों?
जी-7 में शामिल अधिकांश देश रूस और चीन के विरोधी हैं. इस वक्त यूरोप रूस के साथ युद्ध में उलझा है. ईरान में शांति समझौते के बाद अमेरिका की नजर यूक्रेन रूस युद्ध पर है. यूरोप चाहता है कि यूक्रेन की शर्तों पर रूस के साथ शांति समझौता हो.
मंगलवार (16 जून) को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की. इस मीटिंग में डील को लेकर बातचीत की गई. जी-7 में शामिल देशों की कोशिश यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की है.








