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छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड को खत्म करने का प्रस्ताव: वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने CM साय को लिखा पत्र

रायपुर:

छत्तीसगढ़ की शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को एक औपचारिक पत्र लिखकर राज्य के मरसा बोर्ड को समाप्त करने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। डॉ. सलीम राज का सुझाव है कि मदरसा बोर्ड की जगह राज्य में ‘छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया जाए, जिससे मुस्लिम समुदाय के बच्चों को धार्मिक तालीम के साथ-साथ आधुनिक और व्यावसायिक शिक्षा मिल सके।

उत्तराखंड मॉडल का दिया हवाला

3 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को भेजे गए इस पत्र में डॉ. सलीम राज ने उत्तराखंड सरकार के फैसले का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में भी मदरसा शिक्षा परिषद को भंग कर ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ में भी इसी तर्ज पर व्यवस्था लागू की जानी चाहिए ताकि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र देश की मुख्यधारा की शिक्षा से सीधे जुड़ सकें।

“एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर हो”

डॉ. सलीम राज ने अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य को लेकर एक बड़ा विजन सामने रखा है। उन्होंने पत्र में लिखा “सरकार और समाज का उद्देश्य ऐसा होना चाहिए कि मदरसा विद्यार्थियों के एक हाथ में पवित्र कुरान हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर। वे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक शिक्षा पाकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में देश का नाम रोशन करें।”

छत्तीसगढ़ के मदरसों की वर्तमान स्थिति और चिंताएं

पत्र में राज्य के मदरसों की मौजूदा स्थिति पर भी आंकड़े और चिंताएं साझा की गई हैं:

  • कुल संख्या: छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 418 मदरसे संचालित हैं।
  • पाठ्यक्रम की कमी: इनमें से कुछ संस्थान प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन अधिकांश में आधुनिक शिक्षा प्रणाली (जैसे साइंस, मैथ्स, कॉमर्स) के अनुरूप पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं है।
  • रोजगार पर असर: केवल दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) पर अधिक ध्यान दिए जाने के कारण इन बच्चों के भविष्य और रोजगार के अवसर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस बदलाव को लागू करने के लिए दो प्रमुख सुझाव रखे हैं:

  1. बोर्ड का विलय: राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को सीधे ‘विद्यालयी शिक्षा परिषद’ (CG Board) से जोड़ दिया जाए।
  2. विशेषज्ञ समिति का गठन: एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए जो यह तय करे कि धार्मिक शिक्षा की पवित्रता को बनाए रखते हुए, उसमें आधुनिक विषयों और कौशल विकास (Skill Development) का समावेश किस प्रकार किया जाए।

आगे क्या?

डॉ. सलीम राज के इस पत्र के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकार इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर जल्द ही कोई बड़ा नीतिगत फैसला ले सकती है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो छत्तीसगढ़ के अल्पसंख्यक शिक्षा ढांचे में यह अब तक का सबसे बड़ा सुधार होगा।

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