जगदलपुर। बहुचर्चित झीरमघाटी हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत में चल रही अंतिम बहस बुधवार को पूरी हो गई। 10 अगस्त से शुरू हुई अंतिम बहस तीन दिन तक चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
बुधवार सुबह 11 बजे से बचाव पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें प्रस्तुत कीं। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से रिपीटर दलीलें रखी गईं। दोपहर चायकाल तक दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई। मामले में अभियोजन की ओर से अधिवक्ता दिनेश पानिग्राही और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने अंतिम बहस में हिस्सा लिया।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से निकलकर झीरम घाटी से गुजर रही थी। इसी दौरान माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था। एनआईए की जांच के अनुसार, इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 35 लोग घायल हुए थे।
हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई थी। सुरक्षाबलों के जवान और आम नागरिक भी इस हमले में मारे गए थे।
10 आरोपियों के खिलाफ चल रही थी सुनवाई
मामले में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था, जबकि 150 से 200 अन्य माओवादियों को भी आरोपी बनाया गया। एनआईए ने इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। शेष 10 आरोपियों के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही थी।
अब दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 31 अगस्त को न्यायालय इस बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुनाएगा।










