हैदराबाद। देश में नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार ठोस रणनीति के साथ एंटी-नक्सल ऑपरेशन चला रही हैं। इसी अभियान का बड़ा प्रभाव तेलंगाना में देखने को मिला, जहां 37 सक्रिय नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन सभी ने तेलंगाना पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया।
पुलिस ने बताया कि सरेंडर करने वालों में संगठन के कई महत्वपूर्ण कैडर शामिल हैं। इनमें कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा के करीबी सहयोगी एर्रा के साथ-साथ सेंट्रल कमिटी (CC) के सदस्य आजाद उर्फ अप्पासी नारायण भी मौजूद थे। ये सभी लंबे समय से आंध्र-तेलंगाना बार्डर और दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे और कई बड़ी नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने संगठन की विचारधारा से मोहभंग, कठोर जीवन परिस्थितियों, स्वास्थ्य समस्याओं और बेहतर भविष्य की इच्छा के चलते हथियार छोड़ने का निर्णय लिया। तेलंगाना पुलिस ने इसे नक्सल-विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
DGP ने सरेंडर करने वालों का स्वागत करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें सुरक्षा, पुनर्वास राशि, रोजगार सहायता और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
पुलिस का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण करना इस बात का संकेत है कि संगठन की पकड़ कमजोर हो रही है और सरकारी रणनीति सही दिशा में काम कर रही है।









