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CG NEWS: झीरम घाटी पर नार्को टेस्ट की मांग पड़ी भारी, कांग्रेस ने वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पद से हटाया

रायपुर। झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर दिया गया एक बयान अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए अंदरूनी सियासी संकट का कारण बन गया है। कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने अपने ही वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उस पत्र के बाद की गई, जो तिवारी ने झीरम घाटी हत्याकांड की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को लिखा था।

इस पत्र में विकास तिवारी ने जहां बीजेपी नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग की थी, वहीं साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही थी। यही बात कांग्रेस नेतृत्व को नागवार गुजरी।

पार्टी के आधिकारिक लेटर से खुला पूरा मामला

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि विकास तिवारी का यह कदम पार्टी की आधिकारिक नीति और लाइन के खिलाफ है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि झीरम घाटी हत्याकांड भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई घटना है और इसकी नैतिक व राजनीतिक जिम्मेदारी भाजपा पर ही बनती है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को जांच के कटघरे में खड़ा करना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि इसे अनुशासनहीनता माना गया है।

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कार्रवाई

कांग्रेस प्रदेश कमेटी के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देशानुसार विकास तिवारी को तत्काल प्रभाव से वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि प्रवक्ता का हर बयान पार्टी की सोच और आधिकारिक स्टैंड को दर्शाता है, लेकिन इस मामले में तिवारी का बयान पूरी तरह व्यक्तिगत था।

कारण बताओ नोटिस भी जारी

कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू ने विकास तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि मीडिया और पत्र के माध्यम से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का नाम जोड़कर नार्को टेस्ट की मांग करना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है। तिवारी से 3 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

वही विकाश तिवारी को पद से हटाए जाने पर भाजपा नेता राधिका खेरा ने कांग्रेस पर तंज कसा है। उन्होंने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा- दीपक बैज छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष है या फिर भूपेश कांग्रेस कमेटी के? एक बार फिर दीपक बैज अपने आका के सामने सर झुकाते नजर आए

जेपी नड्डा के बयान के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर दिए गए बयान के बाद विकास तिवारी ने न्यायिक आयोग को पत्र लिखा था। इसी पत्र ने सियासी विवाद को जन्म दिया और कांग्रेस के भीतर असंतोष की चिंगारी भड़का दी।

पार्टी के भीतर उभरा असंतोष

पत्र सार्वजनिक होते ही कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे पार्टी विरोधी कदम बताया। अंदरखाने यह माना गया कि इस तरह के बयान से कांग्रेस की एकजुटता कमजोर होती है और विपक्ष को हमला करने का मौका मिलता है। इसके बाद तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई।

कांग्रेस का सख्त संदेश-अपनी पार्टी पर सवाल नहीं

इस पूरे घटनाक्रम के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी मंच का इस्तेमाल कर अपने ही नेताओं को कटघरे में खड़ा करना स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि आगे भी इस तरह की अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

झीरम घाटी को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी सियासत फिर उजागर

विकास तिवारी प्रकरण ने झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विकास तिवारी अपने स्पष्टीकरण में क्या जवाब देते हैं और पार्टी आगे क्या रणनीति अपनाती है।

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