बीजिंग। चीन में इन दिनों एक कांच कारीगर अपनी अनोखी शक्ल-सूरत को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग उसे प्यार और हैरानी के साथ ‘मेंढक राजकुमार’ (Frog Prince) कहकर बुला रहे हैं। दरअसल, करीब 30 साल तक लगातार कांच फूंकने की मेहनत ने इस शख्स के चेहरे की बनावट को असामान्य रूप से बदल दिया है।
30 साल की मेहनत ने बदली चेहरे की संरचना
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और जेएक्सन्यूज डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, 48 वर्षीय झांग दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के झोंगशान स्थित एक कांच फैक्ट्री में काम करते हैं। उनका काम धातु की लंबी पाइप से पिघले कांच में हवा भरकर उसे आकार देना है। लगातार मुंह से हवा फूंकने के कारण उनके गालों की मांसपेशियां ढीली और असामान्य रूप से विकसित हो गईं, जिससे अब थोड़ी सी हवा भरते ही उनके गाल गुब्बारे की तरह फूल जाते हैं।
सहकर्मी बोले—‘बड़े मुंह वाला भाई’
फैक्ट्री में काम करने वाले उनके साथी उन्हें मज़ाकिया अंदाज़ में ‘बड़े मुंह वाला भाई’ कहते हैं, जबकि झांग खुद हल्के-फुल्के अंदाज़ में अपने लिए ‘फ्रॉग प्रिंस’ नाम का इस्तेमाल करते हैं। झांग बताते हैं कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब उनका चेहरा बिल्कुल सामान्य था। लेकिन वर्षों तक लगातार फूंक मारने से चेहरे की मांसपेशियां खिंचती चली गईं और धीरे-धीरे उनका चेहरा बदलता चला गया।
हज़ार साल पुरानी कला
कांच फूंकने की कला चीन में 1,000 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है। हालांकि आधुनिक दौर में मशीनों के जरिए कांच के बर्तन बनाए जाते हैं, लेकिन जटिल और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद आज भी हाथ से फूंककर ही तैयार किए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी हाथ से बने कांच के बर्तन हल्के होते हैं और उनके किनारे ज्यादा पतले और आकर्षक होते हैं।
मशीन बनाम कारीगर
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक कारीगर एक मिनट में करीब 6 कांच के कप बना सकता है, वहीं मशीन उसी समय में 45 कप तैयार कर देती है। बावजूद इसके, हाथ से बने कांच के उत्पादों की गुणवत्ता आज भी बेहतर मानी जाती है। झांग की कहानी मेहनत, परंपरागत कला और उसके शारीरिक प्रभावों की एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।








