नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के कथित कोयला लेवी घोटाले में लंबे समय से जेल और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे मुख्य आरोपियों के लिए राहत भरी खबर आई है। उच्चतम न्यायालय ने मुख्यमंत्री सचिवालय की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया, निलंबित आईएएस रानू साहू और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत अन्य आरोपियों की नियमित जमानत मंजूर कर ली है।
अदालत का फैसला और शर्तें
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बग़ाची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। हालांकि, जमानत के साथ अदालत ने कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं. आरोपियों को जमानत की अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच या गवाहों को प्रभावित न किया जा सके। आरोपी इससे पहले अंतरिम जमानत (Interim Bail) पर बाहर थे, जिसे अब कोर्ट ने नियमित जमानत में बदल दिया है।
दिग्गज वकीलों के बीच हुई बहस
अदालत में दोनों पक्षों की ओर से देश के नामचीन वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं. वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे, हर्षवर्धन परघनीया, शशांक मिश्रा, तुषार गिरी और मुक्ता गुप्ता ने आरोपियों का पक्ष रखा। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने पैरवी की।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर अवैध लेवी (वसूली) से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। आरोप है कि प्रति टन कोयले पर ₹25 की अवैध वसूली की गई थी, जिससे करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। इस मामले में सौम्या चौरसिया और रानू साहू काफी समय तक जेल में रहीं और उनकी जमानत याचिकाएं निचली अदालतों से कई बार खारिज हो चुकी थीं।









