सोना और चांदी… दोनों ही कीमती धातुओं ने महंगाई के ऐसे झंडे गाड़ दिए हैं कि पुराने सारे रिकॉर्ड एक झटके में ध्वस्त हो गए हैं। चांदी ने इतिहास रचते हुए 4 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं सोने की चमक अब आम खरीदार की पहुंच से दूर होती जा रही है। बाजार में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने निवेशकों से लेकर ग्राहकों तक हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ये कीमतें जाकर रुकेंगी कहां।
24 घंटे में पलट गया पूरा खेल
चांदी ने जिस रफ्तार से छलांग लगाई है, उसने बाजार के जानकारों को भी हैरान कर दिया है। एमसीएक्स पर चांदी का भाव 4,07,456 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में भी चांदी ने अपनी ऑल-टाइम हाई कीमत दर्ज कराई है।
गौर करने वाली बात यह है कि 4 लाख रुपये के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए चांदी को महज 15 हजार रुपये की जरूरत थी, जिसे उसने सिर्फ 24 घंटे के भीतर पूरा कर लिया।
बीते मंगलवार को चांदी के भाव में 40,500 रुपये का भारी उछाल देखने को मिला था, जबकि बुधवार को कीमतों में 15,000 रुपये की और बढ़ोतरी हो गई।
सोना भी नहीं है पीछे
सिर्फ चांदी ही नहीं, सोने की कीमतें भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। एमसीएक्स पर सोने का भाव 1,75,869 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 5,000 रुपये की बढ़त के साथ 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोने की इस तेजी ने आम ग्राहकों की जेब पर सीधा असर डाला है।
आखिर क्यों बेकाबू हो रही हैं कीमतें?
कीमती धातुओं में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय वजहें हैं।
डॉलर की कमजोरी:
अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट ने सोने और चांदी को मजबूती दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिले हैं कि वे कमजोर डॉलर के पक्ष में हैं। जब डॉलर कमजोर होता है, तो निवेशक सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं।
सुरक्षित निवेश की तलाश:
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सौमिल गांधी के मुताबिक, दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक शेयर बाजार और करेंसी से दूरी बनाकर सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
ब्याज दरों का गणित:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों पर भी बाजार की नजर है। ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद ने कीमती धातुओं की मांग को और बढ़ा दिया है।









