रायपुर: राजधानी रायपुर में टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ DGGI (माल एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक को अंजाम दिया है। विभाग ने करोड़ों रुपए के फर्जी इनवॉइसिंग और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए रायपुर के प्रमुख कारोबारी संतोष वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।
कागजों पर चलता था करोड़ों का कारोबार
DGGI की जोनल यूनिट ने खुफिया जानकारी और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स की मदद से इस फर्जीवाड़े को पकड़ा। जांच में पता चला कि संतोष वाधवानी अपने बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म ‘मेसर्स विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी’ का असल संचालन खुद कर रहे थे। इस फर्म का मुख्य काम बिना किसी माल की सप्लाई किए केवल कागजों पर फर्जी बिल (Invoices) जारी करना था।
80 करोड़ के बिल, 14 करोड़ की चपत
अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने लगभग 80 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने को 14.45 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। इस खेल में बिना वास्तविक व्यापार के भारी-भरकम ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का दावा किया गया, जो सीधे तौर पर टैक्स की चोरी है।
डेटा एनालिटिक्स और ई-वे बिल से खुला राज
DGGI ने आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा किया। बैंक स्टेटमेंट और ई-वे बिल डेटा के मिलान से यह स्पष्ट हो गया कि फर्म द्वारा दिखाए गए लेनदेन धरातल पर शून्य थे। इस आधार पर 29 जनवरी की रात टीम ने संतोष वाधवानी को हिरासत में लिया।
जेल पहुंचे कारोबारी, और भी नाम आएंगे सामने
गिरफ्तारी के बाद संतोष वाधवानी को रायपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। विभाग अब इस रैकेट से जुड़ी अन्य फर्मों और शामिल लोगों की तलाश कर रहा है।
DGGI की चेतावनी: “राजस्व को नुकसान पहुँचाने वाली हर अवैध गतिविधि पर हमारी पैनी नजर है। फर्जी इनवॉइसिंग के जरिए टैक्स चोरी करने वालों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।”









