रायपुर। राजधानी रायपुर के शैक्षणिक संस्थानों में गैस सिलेंडर की कमी अब बड़ी चुनौती बन गई है। अधिकतर कॉलेज और हॉस्टल में केवल एक-दो दिन का सिलेंडर स्टॉक शेष है। इसके चलते कई संस्थानों ने भोजन बनाने के तरीके और मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है।
रविवि में पारंपरिक चूल्हों से भोजन
प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय पं. रविशंकर शुक्ल विवि में शुक्रवार से छात्रावास में भोजन बनाने के लिए चूल्हे तैयार कर दिए गए हैं। विवि परिसर में गिरे सूखे वृक्षों की लकड़ियों को इकट्ठा किया गया है और मिट्टी से चूल्हे बनाए गए हैं। विवि में 111 बालक और 300 बालिकाओं के लिए प्रतिदिन दोपहर और रात का भोजन बनाया जाता है।
मेन्यू में बदलाव
कैटर्स संचालक सुधीर ने बताया कि नाश्ते में गैस न होने के कारण रेडी-टू-ईट नाश्ता दिया जाएगा। इसके अलावा रोटी की जगह चावल और कम ईंधन वाले व्यंजन बनाए जाएंगे। एनआईटी, ट्रिपल आईटी और एचारन एलयू सहित कई बड़े संस्थानों ने भी इसी तरह के बदलाव किए हैं।
निजी स्कूलों पर भी असर
निजी स्कूलों में भी मेस संचालित होने के कारण गैस की कमी ने मुश्किलें पैदा की हैं। अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि रोटी की जगह रेडी-टू-ईट फूड दिया जा रहा है। पालकों को भी इसकी सूचना दी जा रही है।
राहत भी है
सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी मध्यान्ह भोजन में कोई दिक्कत नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विवि में भी सेमेस्टर ब्रेक होने के कारण हॉस्टल में ठहरे छात्रों के लिए स्टॉक पर्याप्त है।
विकल्प तैयार
रविवि मीडिया प्रभारी प्रो. राजीव चौधरी ने बताया कि यदि सिलेंडर नहीं मिलता, तो पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों से भोजन तैयार किया जाएगा, ताकि छात्रों को भोजन में कोई परेशानी न हो।










