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सुरक्षा कैंप बनेंगे सेवा केंद्र… बस्तर में अमित शाह का बड़ा ऐलान

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में नक्सलवाद के खात्मे के बाद शांति और विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को बस्तर के ऐतिहासिक नेतानार में ‘सेवा डेरा’ अभियान का भव्य शंखनाद किया। इस ऐतिहासिक पहल के तहत बस्तर में अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के लिए बनाए गए सुरक्षा कैंपों को अब ‘सेवा केंद्रों’ में तब्दील किया जा रहा है, जो स्थानीय आदिवासियों के लिए विकास और सुशासन का मुख्य केंद्र बनेंगे।


शहीद वीर गुंडाधुर की धरती से ऐतिहासिक शुरुआत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “मेरे लिए यह बेहद ऐतिहासिक और भावुक दिन है। जिस धरती पर शहीद वीर गुंडाधुर ने विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, आज उसी की प्रेरणा से सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदला जा रहा है। जिस नेतानार में कभी छह जवान शहीद हुए थे, आज वहां आदिवासियों के कल्याण के लिए सेवा केंद्र खोला गया है।”

उन्होंने अतीत को याद करते हुए कहा कि मैंने बस्तर में नक्सलियों का वह खौफनाक दौर देखा है, जब आईईडी (IED) धमाकों से लोग अपाहिज हो जाते थे और बच्चों को स्कूलों से उठा लिया जाता था। आजादी के बाद से इस सुदूर अंचल तक सरकार की कोई योजना नहीं पहुंच पाई थी।


70 कैंप बनेंगे जन सुविधा केंद्र; रायपुर को लाएंगे बस्तर के गांवों तक

गृहमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प के लिए कई बड़ी घोषणाएं और उपलब्धियां साझा कीं:

  • कैंपों का कायाकल्प: बस्तर के कुल 200 सुरक्षा कैंपों में से पहले चरण में 70 कैंपों को जन सुविधा केंद्रों के रूप में बदला जाएगा।
  • रायपुर जाने की जरूरत नहीं: अमित शाह ने संकल्प दोहराया कि “एक साल के भीतर हम सरकार को रायपुर से सीधे बस्तर के गांवों तक लेकर आएंगे। यहाँ के नागरिकों को अपने कामों के लिए रायपुर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।”
  • 371 योजनाओं का लाभ: इन सेवा केंद्रों में स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की 371 जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे मिलेगा। यहीं पर ग्रामीणों के राशन कार्ड, अन्य जरूरी दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की राशि का भुगतान (बैंकिंग सुविधा) सुनिश्चित किया जाएगा।

NID तैयार करेगी डिजाइन; प्रौढ़ शिक्षा पर जोर

  • अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: इन कैंपों को सर्वसुविधायुक्त और संपूर्ण बनाने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) को प्रोजेक्ट दिया जा रहा है, जो इसका मास्टर प्लान तैयार करेगी।
  • प्रौढ़ शिक्षा की पहल: आत्मसमर्पण करने वाले 3,000 नक्सलियों में से लगभग 200 निरक्षर हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से ऐसे 2,000 लोगों को प्रौढ़ शिक्षा दी जा रही है।
  • बस्तर ओलंपिक: अंचल के युवाओं को मुख्यधारा और खेल से जोड़ने के लिए ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडूम’ जैसे कांसेप्ट की शुरुआत की गई है।

श्वेत क्रांति और वनोपज से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

बस्तर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए गृहमंत्री ने दो बड़े आर्थिक मॉडलों की घोषणा की:

1. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) मॉडल:

तीन महीने पहले राज्य के उपमुख्यमंत्री को गुजरात भेजकर वहां के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराया गया था। अब NDDB के माध्यम से बस्तर के हर गांव तक डेयरी पहुंचेगी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हर आदिवासी महिला को दो पशु (मवेशी) प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्र में श्वेत क्रांति आएगी।

2. राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव:

स्थानीय वनोपज (Forest Produce) के सही दाम और रोजगार के लिए एक नेशनल लेवल कोऑपरेटिव का गठन किया जा रहा है। इसके जरिए बस्तर के वनोपजों की बेहतरीन पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग की जाएगी।

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