रायपुर। झारखंड में हुए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले, जिसकी जड़ें छत्तीसगढ़ से जुड़ी बताई जा रही हैं, उसकी जांच अब सीबीआई (CBI) नहीं करेगी। सीबीआई के रायपुर जोनल कार्यालय ने इस प्रकरण की जांच करने से स्पष्ट तौर पर इन्कार कर दिया है। यह जानकारी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता द्वारा पेश किए गए एक पत्र के माध्यम से सामने आई है।
सीबीआई ने क्यों किया इनकार?
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में हुई। इस दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने सीबीआई के ‘हेड ऑफ ब्रांच’ द्वारा भेजा गया पत्र कोर्ट में रखा। पत्र में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव की ओर से जांच के लिए जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसे सीबीआई ने वापस कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की जांच करने के लिए इच्छुक नहीं है।
क्या है झारखंड शराब घोटाला?
यह पूरा मामला रांची निवासी विकास सिंह की शिकायत पर आधारित है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने एक सुनियोजित साजिश के तहत झारखंड में भी उसी तर्ज पर घोटाले को अंजाम दिया, जैसा छत्तीसगढ़ में हुआ था। शिकायत में झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह और छत्तीसगढ़ उत्पाद विभाग के अधिकारियों समेत मार्केटिंग कॉरपोरेशन के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। फिलहाल इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही है।
हाईकोर्ट में याचिकाओं की स्थिति
ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर को लेकर हाईकोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं लंबित हैं। इसमें आरोपियों द्वारा मामले को चुनौती दी गई है। सीबीआई के हटने के बाद अब राज्य की एजेंसियों और महाधिवक्ता को मामले के मेरिट पर अपनी दलीलें पेश करनी होंगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय की है।
छत्तीसगढ़ कनेक्शन ने बढ़ाई थी हलचल
माना जा रहा था कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के शराब सिंडिकेट के तार आपस में जुड़े हुए हैं, जिसके चलते छत्तीसगढ़ सरकार ने इसकी केंद्रीय एजेंसी से जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई के इनकार के बाद अब गेंद एक बार फिर राज्य की जांच एजेंसियों के पाले में है।









