Baloda Bazar News: छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच अब डिजिटल फसल गिरदावरी का काम भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पटवारियों की अनुपस्थिति में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को PV App के जरिए खेतों में जाकर फसल सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर तहसीलदार संघ ने आपत्ति जताई है। संघ ने 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अधिकारियों को अनिवार्य मैदानी सर्वेक्षण से छूट देने और डिजिटल सर्वे में आ रही तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग की है।
संघ की ओर से पत्र में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 32 लाख से अधिक खसरों की डिजिटल प्रविष्टियां की जानी हैं। इनमें से 23 लाख से ज्यादा खसरों की प्रविष्टियां अब भी लंबित हैं। ऐसे में निर्धारित समय-सीमा में फसल गिरदावरी पूरी करना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।
CG News: 23.67 लाख खसरों की प्रविष्टियां अब भी लंबित
तहसीलदार संघ ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) और PV App के माध्यम से फसल सर्वेक्षण में आ रही समस्याओं का जिक्र किया है। पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 32,15,837 खसरों में से अब तक 8,48,504 खसरों की प्रविष्टियां पूरी हुई हैं। वहीं, 23,67,333 खसरों की प्रविष्टियां लंबित हैं।
धान की फसल वाले खसरों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बताई गई है। प्रदेश में धान की फसल वाले कुल 16,24,868 खसरों में से 5,67,991 खसरों की प्रविष्टियां पूरी की गई हैं, जबकि 10,56,873 खसरों की प्रविष्टियां अभी बाकी हैं। इन आंकड़ों के आधार पर फसल गिरदावरी का काम पूरा करने के लिए प्रशासन को लंबित प्रविष्टियों पर तेजी से काम करना होगा।
पटवारियों की हड़ताल के बीच तहसीलदार संघ को क्यों है आपत्ति?
पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है। इसी बीच तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को मैदानी क्षेत्रों में जाकर PV App से फसल सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी दिए जाने पर संघ ने चिंता जताई है।
संघ का कहना है कि तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के पास पहले से ही कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजस्व संबंधी जिम्मेदारियां हैं। इनमें नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और न्यायिक प्रकरणों का निराकरण शामिल है।
यदि अधिकारियों को अतिरिक्त रूप से खेतों में जाकर फसल सर्वेक्षण करना पड़ता है, तो उनके नियमित काम प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर राजस्व संबंधी मामलों के निपटारे और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ने की आशंका है।
PV App में तकनीकी दिक्कतें बढ़ा रहीं परेशानी
तहसीलदार संघ ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण के दौरान आने वाली तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। संघ के अनुसार, PV App के माध्यम से सर्वेक्षण करते समय कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
इनमें प्रमुख समस्याएं हैं:
- गैर-जियोरेफरेंस्ड खसरों की पहचान और सर्वेक्षण।
- पॉलीगॉन ट्रेसिंग में आने वाली कठिनाइयां।
- GPS की अशुद्धता के कारण लोकेशन संबंधी समस्याएं।
- कमजोर इंटरनेट नेटवर्क और सर्वर से जुड़ी दिक्कतें।
- दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी।
संघ का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान किए बिना तय समय-सीमा में डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए तकनीकी व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ सर्वेक्षण की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री से तहसीलदार संघ ने कीं ये प्रमुख मांगें
तहसीलदार संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा स्थिति में कई कदम उठाने का आग्रह किया है। संघ की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- पटवारियों की हड़ताल का समाधान: हड़ताल समाप्त कराने के लिए जल्द उचित पहल की जाए, ताकि राजस्व संबंधी कार्य सामान्य हो सकें।
- PV App की तकनीकी समस्याओं का निराकरण: डिजिटल फसल सर्वेक्षण में आ रही GPS, नेटवर्क, सर्वर और अन्य तकनीकी परेशानियों को दूर किया जाए।
- मैदानी सर्वेक्षण से छूट: तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को अनिवार्य रूप से खेतों में जाकर सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाए।
- समय-सीमा पर पुनर्विचार: मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फसल गिरदावरी की समय-सीमा निर्धारित करने पर विचार किया जाए।
- स्पष्ट SOP जारी हो: लंबित सर्वेक्षण पूरा कराने के साथ उसके सत्यापन और अनुमोदन के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाए।
अब इन मांगों पर शासन की ओर से लिए जाने वाले फैसले पर नजर रहेगी।
फसल गिरदावरी में देरी से क्या बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
फसल गिरदावरी कृषि और राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके तहत खेतों में बोई गई फसलों से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। ऐसे में सर्वेक्षण का काम लंबित रहने से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
छत्तीसगढ़ में एक ओर पटवारियों की हड़ताल के कारण कामकाज प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल फसल सर्वेक्षण की लंबित प्रविष्टियां प्रशासन के सामने चुनौती पेश कर रही हैं। यदि तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को अतिरिक्त मैदानी जिम्मेदारी दी जाती है, तो उनके नियमित कामों के प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, फसल गिरदावरी में देरी का वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह आगे की प्रशासनिक व्यवस्था और शासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
अब शासन के फैसले का इंतजार
पटवारियों की हड़ताल, PV App की तकनीकी समस्याओं और बड़ी संख्या में लंबित खसरों की प्रविष्टियों के बीच फसल गिरदावरी को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन गया है। तहसीलदार संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांगें रख दी हैं।
अब देखना होगा कि शासन तकनीकी समस्याओं को दूर करने, सर्वेक्षण की समय-सीमा और अधिकारियों की मैदानी ड्यूटी को लेकर क्या निर्णय लेता है। फिलहाल, फसल गिरदावरी की प्रगति और तहसीलदार संघ की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।










