रायपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। स्थानीय कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप के बेटे और पेशे से चिकित्सक (डॉक्टर) लोकेंद्र कश्यप की सेवाएं प्रशासन ने अचानक समाप्त कर दी हैं। डॉ. लोकेंद्र पर सोशल मीडिया पर ‘शासन विरोधी’ पोस्ट साझा करने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस विधायक ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
डॉ. लोकेंद्र कश्यप पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कुछ ऐसे मुद्दों और पोस्ट को साझा किया था, जिन्हें प्रशासन ने शासन और व्यवस्था के खिलाफ माना। सिविल सेवा आचरण नियमों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया। इस आदेश के बाद से ही क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और विवाद तेज हो गए हैं।
विधायक व्यास कश्यप का पलटवार: “यह दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है”
इस कार्रवाई को लेकर विधायक व्यास कश्यप ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस फैसले को सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला और ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया है।
विधायक कश्यप का पक्ष उन्होंने कहा कि उनके बेटे की सेवा समाप्त किया जाना वर्तमान व्यवस्था की पारदर्शिता और नीयत पर गंभीर प्रश्न उठाता है। विधायक ने दावा किया कि डॉ. लोकेंद्र की पोस्ट किसी व्यक्ति या शासन को निशाना बनाने के लिए नहीं थीं, बल्कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की अव्यवस्थाओं और आम जनता की समस्याओं को उजागर कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और जनसेवक को कमियों पर बात रखने का अधिकार है।
क्षेत्र में गरमाई राजनीति
इस फैसले के बाद जांजगीर-चांपा और रायपुर के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस समर्थकों और स्थानीय नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के विधायक का बेटा होने और स्वास्थ्य विभाग की कमियों को सामने लाने की वजह से डॉ. लोकेंद्र को जानबूझकर टारगेट किया गया है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत या नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बहरहाल, इस कार्रवाई ने राज्य में अभिव्यक्ति की आजादी और प्रशासनिक सेवा नियमों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।










