बिलासपुर। यूथ कांग्रेस चुनाव के मतदान का आखिरी दिन नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। बिलासपुर में मतदान के आखिरी दौर में वोटिंग में अचानक हुई बढ़ोतरी और सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल ऑडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यूथ कांग्रेस का ऑनलाइन मतदान 30 अगस्त से 29 सितंबर तक चल रहा है। प्रदेशभर में 10 लाख से अधिक युवा सदस्यों के लिए मतदान की व्यवस्था की गई है।
वायरल ऑडियो में फर्जी वोटिंग के दावे
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें फर्जी वोटिंग और वोट मैनेज करने को लेकर बातचीत हो रही है। ऑडियो में कांग्रेस नेता पांडेय का नाम लिए जाने की बात भी सामने आ रही है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज किसकी है, बातचीत कब और किस संदर्भ में हुई तथा उसमें कही गई बातें वास्तविक हैं या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आखिरी दिनों में पांच गुना तक बढ़ी वोटिंग का दावा
चुनाव से जुड़े लोगों के मुताबिक, बिलासपुर में मतदान के शुरुआती और मध्य दौर में प्रतिदिन करीब 500 से 1,100 वोट तक पड़ रहे थे। वहीं, मतदान के आखिरी दिनों में यह संख्या बढ़कर करीब 2,500 से 5,000 वोट प्रतिदिन तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
इस तरह मतदान की रफ्तार में कई गुना बढ़ोतरी की बात सामने आ रही है। इसी बढ़ोतरी को लेकर यूथ कांग्रेस से जुड़े अलग-अलग गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
एक पक्ष का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में समर्थकों की सक्रियता बढ़ने के कारण मतदान में तेजी आई है। वहीं, दूसरे पक्ष ने इतनी तेजी से बढ़ी वोटिंग पर सवाल उठाते हुए फर्जी मतदान की आशंका जताई है।
अधिकारी बोले- फोटो या वीडियो मिलने पर होगी पुष्टि
मामले में जोनल रिटर्निंग ऑफिसर नरेंद्र कुमार ने कहा कि किसी भी आरोप की पुष्टि तभी की जा सकती है, जब उनके सामने फोटो या वीडियो जैसे ठोस साक्ष्य आएं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप चुनाव के दौरान सामने आते रहते हैं और कई बार आरोप सही भी पाए जाते हैं। ऐसी स्थिति में मामले की विभिन्न स्तरों पर जांच की जाती है।
फिलहाल वायरल ऑडियो और फर्जी वोटिंग के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो में किए गए दावों में कितनी सच्चाई है।










